मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने इजरायल को लेकर अब तक की सबसे बड़ी धमकी दी है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि अगर उनके देश में सत्ता परिवर्तन कराने की कोशिश की गई तो इजरायल के बेहद गुप्त डिमोना परमाणु केंद्र पर हमला किया जा सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान की मौजूदा सरकार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
ईरान की कड़ी चेतावनी
ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर बाहरी ताकतें ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करती हैं तो इसका सीधा जवाब दिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार, ऐसी स्थिति में इजरायल के नेगेव रेगिस्तान में स्थित डिमोना परमाणु केंद्र को निशाना बनाया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में पहले से ही सैन्य तनाव बढ़ा हुआ है और दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज होती जा रही है।
अमेरिका और इजरायल के बयान से बढ़ा तनाव
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कई बार यह संकेत दे चुके हैं कि ईरान की मौजूदा सरकार को लेकर सख्त रुख अपनाया जा सकता है। कुछ रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका युद्ध को लेकर दबाव की रणनीति अपना रहा है, जबकि दूसरी ओर कुछ अधिकारियों का कहना है कि परिस्थितियों के अनुसार अमेरिका पीछे भी हट सकता है।
डिमोना परमाणु केंद्र क्यों है इतना अहम
डिमोना परमाणु केंद्र, जिसे आधिकारिक तौर पर शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर कहा जाता है, इजरायल के नेगेव रेगिस्तान में स्थित है। इसे दुनिया के सबसे गुप्त और सुरक्षित परमाणु स्थलों में गिना जाता है। माना जाता है कि इस केंद्र का निर्माण फ्रांस की तकनीकी सहायता से किया गया था और यह इजरायल के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा अहम ठिकाना है।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय अटकलें
हालांकि इजरायल ने आधिकारिक तौर पर अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और खुफिया एजेंसियों का मानना है कि डिमोना केंद्र परमाणु हथियारों के लिए जरूरी प्लूटोनियम के उत्पादन से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से यह जगह रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
सैटेलाइट तस्वीरों से बढ़ी हलचल
हाल के महीनों में सामने आई कुछ सैटेलाइट तस्वीरों में दावा किया गया है कि डिमोना परिसर में नए निर्माण कार्य देखे गए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटकलें तेज हो गई हैं कि इजरायल अपने परमाणु ढांचे को और मजबूत कर रहा है। वहीं सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त बताई जाती है कि इस इलाके के ऊपर से विमान उड़ाना भी प्रतिबंधित माना जाता है।