ईरान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुआ विरोध अब जनवरी 2026 में खुली बगावत का रूप ले चुका है। शुरुआत महंगाई, रियाल की गिरती कीमत और पेट्रोल व खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों से हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन सीधे इस्लामिक गणराज्य और सर्वोच्च नेता के खिलाफ खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरकर सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं और सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं।
सरकार का सख्त एक्शन, इंटरनेट पूरी तरह बंद
जनविद्रोह की आवाज दबाने के लिए सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और फोन नेटवर्क लगभग पूरी तरह बंद कर दिया है। 8 जनवरी से यह बंदी जारी है और 100 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है। हालात ऐसे हैं कि देश के भीतर और बाहर रहने वाले परिवार एक-दूसरे से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। लोगों को यह तक पता नहीं चल पा रहा कि किस इलाके में कार्रवाई हो रही है और किसे गिरफ्तार किया गया है।
घर-घर छापे, छतों से सैटेलाइट डिश जब्त
सिर्फ इंटरनेट बंद करना ही नहीं, अब ईरानी पुलिस घर-घर जाकर छतों से सैटेलाइट डिश भी उतरवा रही है। कई इलाकों में एजेंट खुद को बिजली और पानी विभाग का अधिकारी बताकर घरों में घुस रहे हैं और डिश जब्त कर रहे हैं। साथ ही निजी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी ली जा रही है ताकि प्रदर्शनकारियों की पहचान की जा सके। इससे देश में सूचना का लगभग पूरी तरह ब्लैकआउट हो गया है।
500 से ज्यादा मौतें, 10,000 गिरफ्तारियां
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार सरकारी दमन में अब तक 500 से 640 लोगों की मौत हो चुकी है। 10,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आंदोलन अब 186 से ज्यादा शहरों और सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है। कई जगह प्रदर्शनकारी पहचान से बचने के लिए खुद ही सीसीटीवी कैमरे बंद कर रहे हैं और सड़कों पर आगजनी की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
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सरकार समर्थक रैलियां भी, लेकिन डर का माहौल
हालांकि सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसके समर्थन में भी लोग सड़कों पर हैं। राजधानी तेहरान में सरकार समर्थक बड़ी रैली आयोजित की गई है। लेकिन दूसरी ओर आम लोगों में डर और चिंता बढ़ती जा रही है। लोग अपनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और किसी को नहीं पता अगला नंबर किसका होगा।
अमेरिका को खुली चेतावनी, जंग के लिए तैयार ईरान
इन सबके बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान के विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि देश किसी भी कदम के लिए तैयार है, चाहे वह सैन्य कार्रवाई ही क्यों न हो। उनका कहना है कि पिछली 12 दिनों की लड़ाई के बाद ईरान की तैयारी पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। उधर अमेरिका भी सख्त सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालात बता रहे हैं कि आने वाले दिन और ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं।