
परमाणु समझौते को लेकर ईरान के ऊपर प्रतिबंधों का दौरान एक बार फिर से शुरू हो चुका है। दस साल पुराने प्रतिबंध दोबारा से लगने को लेकर ईरान अमेरिका और यूरोप के ऊपर भड़क गया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का कहना है कि 2015 के परमाणु समझौते को दोबारा से शुरू करने में अमेरिका मुख्य बाधा है। इस समझौते के तहत हटाए गए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध रविवार से एक बार दोबारा लागू हो चुके हैं।
स्नैपबैक व्यवस्था को रफ्तार
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा से लौटने के बाद तेहरान एयरपोर्ट पर ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान का कहना है कि स्नैपबैक व्यवस्था को रफ्तार देने वाले फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी (ई-3) को संयुक्त राष्ट्र की यात्रा के दौरान अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के संग सहयोग को लेकर ईरान की तत्परता के बारे में जानकारी दी थी।
मजबूत ईरान को बर्दाश्त नहीं कर सकता अमेरिका
उन्होंने कहा, अमेरिका हमेशा नए बहाने बनाकर किसी समझौते को सफल होने से रोकने की कोशिश करता है। हालत यह है कि अमेरिका एक मजबूत ईरान को बर्दाश्त नहीं कर सकता है। हमारे देश को कमजोर करना चाहता है। दरअसल ई3 देशों ने स्नैपबैक व्यवस्था को दोबारा से लागू करने का फैसला किया है। इस निर्णय से ईरान भड़क गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से कहा गया है कि ईरान अगर 2015 के परमाणु समझौते को तोड़ेगा तो 30 दिनों के भीतर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को दोबारा से लागू किया जा सकता है।