अंतरराष्ट्रीय राजनीति की तपिश अब सीधे मध्यप्रदेश की थाली तक पहुंच गई है। कड़ाके की ठंड में सेहत का सहारा बनने वाले ड्राई फ्रूट्स इस बार आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। ईरान-अमेरिका तनाव, टैरिफ नीति और वैश्विक अस्थिरता का असर गुना सहित प्रदेश के बाजारों में साफ दिख रहा है, जहां केसर, पिस्ता और बादाम के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं।
ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में क्यों लगी ‘आग’
गुना जिले के बाजारों में बीते दो महीनों के भीतर ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावट है। ईरान-अमेरिका के बीच बिगड़ते व्यापारिक रिश्ते, खाड़ी देशों में अस्थिरता और नए टैरिफ नियमों ने आयात को महंगा बना दिया है। नतीजा यह है कि ठंड में सबसे ज्यादा बिकने वाले सूखे मेवे अब लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगे हैं।
केसर बना ‘सोने से महंगा’ मसाला
सबसे चौंकाने वाली तेजी केसर में देखने को मिली है। ईरान से आयात होने वाला केसर डेढ़ माह पहले तक जहां सवा से डेढ़ लाख रुपए किलो के आसपास था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर ढाई से पौने तीन लाख रुपए किलो तक पहुंच गई है। औषधीय गुणों और धार्मिक उपयोग के चलते मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन ऊंचे दामों ने खरीदारों की संख्या काफी घटा दी है।
पिस्ता, बादाम और अंजीर भी हुए महंगे
केसर के साथ-साथ पिस्ता, बादाम और अंजीर के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। पिस्ता जो पहले 1800–1900 रुपए किलो मिलता था, अब 2400 रुपए किलो तक बिक रहा है। अमेरिकी कैलिफोर्निया बादाम पर टैरिफ का असर पड़ा है, जिससे कीमतों में 20–25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं अफगानिस्तान से आने वाला अंजीर सीमाई और राजनीतिक कारणों से कम पहुंच रहा है, जिससे इसके दाम 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं।
कहां से आता है कौन-सा ड्राई फ्रूट
ईरान केसर और पिस्ता का प्रमुख स्रोत है, लेकिन वहां की स्थिति और परिवहन बाधाओं से सप्लाई प्रभावित है। अफगानिस्तान से आने वाला अंजीर राजनीतिक अस्थिरता की मार झेल रहा है। पाकिस्तान से आयात होने वाले छुआरे सीमा तनाव के कारण घुमावदार रास्तों से आ रहे हैं, जिससे लागत 300 रुपए किलो तक बढ़ गई है। इन सभी कारणों ने बाजार का संतुलन बिगाड़ दिया है।
कारोबार और आम आदमी पर असर
ड्राई फ्रूट्स कारोबार से जुड़े व्यापारियों के अनुसार इतनी अप्रत्याशित तेजी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। माल की कमी और बढ़ी कीमतों के कारण ग्राहक खरीदारी से पीछे हट रहे हैं। वर्तमान में काजू 1000 रुपए, मखाना 1300 रुपए और चिरौंजी 2200 रुपए किलो तक बिक रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में ड्राई फ्रूट्स का मासिक कारोबार करोड़ों में है, लेकिन बढ़ती महंगाई से यह व्यापार भी दबाव में आ गया है।