Iran US War Live: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच जारी बातचीत को लेकर उम्मीद और आशंका साथ-साथ चल रही है। व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ अहम बैठक की, जिसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि अगर बातचीत विफल हुई तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है। वहीं ईरान ने भी साफ संकेत दिए हैं कि वह अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
UAE ने जताई समझौते को लेकर आशंका
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गरगाश ने प्राग में आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावना फिलहाल “50-50” की स्थिति में है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा तो इसका असर पूरी दुनिया के तेल और गैस बाजार पर पड़ेगा। गरगाश ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से यह क्षेत्र बेहद अहम है और इसे राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
ट्रंप ने सुरक्षा टीम संग की बड़ी बैठक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें ईरान के साथ जारी वार्ता और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि बातचीत की धीमी रफ्तार से ट्रंप नाराज हैं और इसी कारण उन्होंने अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की शादी में शामिल न होने का फैसला लिया। उनका मानना है कि मौजूदा स्थिति में व्हाइट हाउस में मौजूद रहना अधिक जरूरी है।
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तेहरान पहुंचे पाकिस्तान सेना प्रमुख
तनाव कम करने की कोशिशों के तहत पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तेहरान पहुंच गए हैं। माना जा रहा है कि वह ईरानी सैन्य नेतृत्व के साथ बातचीत कर हालात को बिगड़ने से रोकने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा कतर का एक प्रतिनिधिमंडल भी तेहरान में मौजूद है। अमेरिकी अधिकारियों ने मौजूदा वार्ता को बेहद कठिन बताया है और कहा है कि दोनों पक्षों के बीच लगातार मसौदे बदले जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
अमेरिका के पास विकल्प कम
ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रजा तलाये-निक ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पास ईरानी शर्तों को मानने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि अगर वॉशिंगटन ईरान के अधिकारों को स्वीकार नहीं करता तो अमेरिका को और राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत अब भी जारी है और किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले 24 घंटे पूरे पश्चिम एशिया की दिशा तय करने वाले माने जा रहे हैं।