अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच बयानबाज़ी भी बेहद तीखी हो गई है। खाड़ी क्षेत्र में हालिया संघर्ष और खर्ग आइलैंड पर हमले के दावों के बाद ईरान ने अमेरिका पर कड़ा पलटवार किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दावा किया कि सिर्फ 14 दिनों की जंग में ही अमेरिका को झुकना पड़ा और अब वह दुनिया से रूस का तेल खरीदने की अपील कर रहा है। इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा राजनीति और भू-राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है।
खर्ग आइलैंड पर हमले के बाद बढ़ा सियासी तापमान
खाड़ी क्षेत्र में हालिया सैन्य टकराव के दौरान अमेरिका की ओर से ईरान के रणनीतिक तेल टर्मिनल खर्ग आइलैंड को निशाना बनाने का दावा किया गया। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। हमले के दावे के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई। ईरान ने अमेरिका के दावों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश बताया।
ईरान का तंज- ‘14 दिन में ही अमेरिका को भीख मांगनी पड़ी’
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अमेरिका पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जो देश महीनों से भारत समेत कई देशों पर रूस से तेल खरीद बंद करने का दबाव बना रहा था, वही अब दुनिया से अपील कर रहा है कि रूस से तेल खरीदा जाए ताकि वैश्विक बाजार में कीमतें नियंत्रित रह सकें। अरागची ने दावा किया कि यह स्थिति दिखाती है कि केवल दो हफ्तों के संघर्ष ने ही अमेरिका को रणनीतिक रूप से असहज कर दिया।
रूस के तेल को लेकर बदला अमेरिकी रुख
वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेजी से बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिका ने कुछ देशों को रूस से तेल खरीदने में अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। यह कदम तब उठाया गया जब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। माना जा रहा है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव और आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक बाजार में दबाव बढ़ा है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज और वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर
ईरान के आसपास का समुद्री इलाका, खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज, दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां से गुजरने वाले जहाजों के जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा ट्रांसपोर्ट होता है। हालिया संघर्ष के कारण इस मार्ग पर खतरे की आशंका बढ़ी, जिससे बाजार में अनिश्चितता और कीमतों में उछाल देखने को मिला।
यूरोपीय देशों पर भी साधा निशाना
ईरान ने अपने बयान में यूरोपीय देशों को भी आड़े हाथों लिया। तेहरान का कहना है कि कुछ यूरोपीय सरकारें अमेरिका के साथ खड़ी होकर इस संघर्ष का समर्थन कर रही हैं। ईरान के मुताबिक, यह सोच कि अमेरिका का समर्थन करके रूस के खिलाफ रणनीतिक फायदा मिल जाएगा, पूरी तरह गलत आकलन है।