ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ गया है, जिसमें इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर हमले किए हैं। ईरान ने भी पलटवार करते हुए 100 से ज्यादा ड्रोन दागे हैं। इजरायल के हमले में ईरान के कई सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं। पाकिस्तान ने इस हमले की निंदा की है और कहा है कि ईरान पर युद्ध थोपा गया है। इजरायल ने दावा किया है कि हमले में ईरान के आर्मी चीफ मोहम्मद बाघेरी और अन्य 20 सैन्य अधिकारी मारे गए हैं।
परमाणु कार्यक्रम इजरायल के लिए बड़ा खतरा
ईरान और इजरायल के बीच शांति प्रक्रिया में कई बाधाएं हैं। इसमें सबसे बड़ी बाधा परमाणु कार्यक्रम है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इजरायल के लिए बड़ा खतरा बना चुका है। इजरायल इसे रोकने को लेकर हर संभव प्रयास कर रहा है। ईरान इजरायल के खिलाफ प्रॉक्सी वार कर रहा है। इस तरह से वह लेबनान में हिज्बुल्लाह, गाजा में हमास और यमन में हूतियों का खात्मा कर रहा है।
अमेरिका इजरायल का समर्थन करता है
इजरायल को लगता है कि ईरान उसकी सुरक्षा में बड़ा खतरा है। वह इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। ईरान की राजनीतिक प्रणाली में शिया धर्मगुरुओं का प्रभाव है, जो इजरायल के विरोध में हैं। अमेरिका का दबाव भी ईरान और इजरायल के बीच शांति प्रक्रिया में बड़ी बाधा है, क्योंकि अमेरिका इजरायल का समर्थन करता है।
ईरान और इजरायल के बीच शाति प्रक्रिया में कई देश मध्यस्थता कर रहे
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान और इजरायल के बीच तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि रूस एक ऐसा समझौता कराने को तैयार है। इस तरह से ईरान शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम चला सके और इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
शांति प्रक्रिया में मध्यस्थता करने की इच्छा व्यक्त की
चीन ने भी ईरान और इजरायल के बीच शांति प्रक्रिया में मध्यस्थता करने की इच्छा व्यक्त की है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इजरायल और ईरान के विदेश मंत्रियों से चर्चा की है। वहीं कतर ने भी ईरान और इजरायल के बीच युद्धविराम में मध्यस्थता की भूमिका निभाई है। पाकिस्तान ने ईरान और इजरायल के बीच शांति प्रक्रिया में मध्यस्थता करने की पेशकश की है।