मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले लगातार जारी हैं, लेकिन 28 दिनों की बमबारी के बावजूद ईरान पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। इसके पीछे वजह हैं उसके कुछ बेहद खतरनाक और आधुनिक हथियार, जो आज भी दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं। ये हथियार तेज, सटीक और छिपाने में आसान हैं, जिससे इन्हें खत्म करना मुश्किल हो रहा है।
फतह मिसाइल: रफ्तार और दिशा बदलने की ताकत
ईरान की फतह-1 और फतह-2 हाइपरसोनिक मिसाइलें इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही हैं। ये बेहद तेज गति से उड़ती हैं और बीच रास्ते में दिशा बदल सकती हैं। यही वजह है कि इन्हें रोकना मुश्किल होता है। इन मिसाइलों को जमीन के नीचे बंकर में छिपाकर रखा जाता है और मोबाइल लॉन्चर से छोड़ा जाता है, जिससे इनका पता लगाना बेहद कठिन हो जाता है।
जोल्फगार मिसाइल: तेजी से हमला करने वाला हथियार
जोल्फगार बैलिस्टिक मिसाइल सॉलिड फ्यूल से चलती है, जिससे इसे तुरंत लॉन्च किया जा सकता है। यह मिसाइल ट्रक से भी दागी जा सकती है और बार-बार अपनी लोकेशन बदल सकती है। यही वजह है कि यह दुश्मन के रडार से बच जाती है और बड़े नुकसान का कारण बनती है। युद्ध के दौरान इसका कई बार इस्तेमाल किया गया है।
शाहेद-136 ड्रोन: सस्ता लेकिन घातक हथियार
ईरान का शाहेद-136 ड्रोन इस युद्ध में सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह बेहद सस्ता है लेकिन हमला करने में बहुत असरदार है। इसे झुंड में भेजा जाता है, जिससे दुश्मन का डिफेंस सिस्टम कन्फ्यूज हो जाता है। कम ऊंचाई पर उड़ने के कारण यह रडार में भी आसानी से नहीं आता और लगातार हमलों में इस्तेमाल हो रहा है।
शाहाब-3: लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल
शाहाब-3 मिसाइल ईरान की पुरानी लेकिन भरोसेमंद ताकत है। यह करीब 1900 किलोमीटर तक मार कर सकती है और बड़े इलाके को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती है। इसे मोबाइल लॉन्चर से चलाया जाता है, जिससे यह आसानी से लोकेशन बदल सकती है और बची रहती है।
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खोर्रमशहर-4: मल्टी टारगेट अटैक की क्षमता
खोर्रमशहर-4 मिसाइल एक साथ कई टारगेट पर हमला करने में सक्षम है। इसमें कई वारहेड लगाए जा सकते हैं, जिससे यह दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को और ज्यादा चुनौती देती है। इसकी रेंज भी लंबी है और इसे गहरे भूमिगत ठिकानों से लॉन्च किया जाता है।
युद्ध में ईरान की रणनीति साफ
इन हथियारों से साफ है कि ईरान सिर्फ ताकतवर ही नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी मजबूत लड़ाई लड़ रहा है। सस्ते और हाई-टेक हथियारों का कॉम्बिनेशन दुश्मन को थकाने की रणनीति का हिस्सा है। यही कारण है कि भारी हमलों के बावजूद ईरान अब भी मुकाबले में बना हुआ है और यह संघर्ष जल्द खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।