ईरानी सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसकी नौसेना ने तेल टैंकर ओशन कोई को जब्त कर लिया है। आरोप है कि यह टैंकर क्षेत्रीय हालात का फायदा उठाकर ईरान के तेल निर्यात को बाधित करने की कोशिश कर रहा था। राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश
सेना ने अपने बयान में कहा कि यह टैंकर ईरान का तेल ले जा रहा था और उसने खास ऑपरेशन की योजना बनाकर ईरान के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। नौसेना ने टैंकर को ईरान के दक्षिणी तट की ओर मोड़ दिया और उसे देश की न्यायिक एजेंसियों को सौंप दिया।
रॉकेटों और लड़ाकू ड्रोनों से निशाना बनाया
एक अलग बयान में सेना ने यह भी कहा कि उसकी नौसेना ने हाल के घंटों में अमेरिकी युद्धपोतों को क्रूज मिसाइलों, रॉकेटों और लड़ाकू ड्रोनों से निशाना बनाया। यह कार्रवाई उन्होंने ईरानी तेल टैंकरों पर हमलों के जवाब में की, जो होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के क्षेत्रीय जल में हुए थे।
जहाज ब्लॉकेड का उल्लंघन कर रहे थे
सेना के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोतों को अपना रास्ता बदलना पड़ा और वे उस इलाके से हट गए। इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी बलों ने 8 मई को एम/टी सी स्टार-III और एम/टी सेवडा को नुकसान पहुंचाया है, इससे पहले कि ये दोनों जहाज ओमान की खाड़ी में ईरानी बंदरगाह में प्रवेश करते। अमेरिका का कहना है कि जहाज उसके ब्लॉकेड का उल्लंघन कर रहे थे। सेंट्रल कमांड ने यह भी कहा कि यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश से एक एक/ए-18 सुपर हॉर्नेट विमान ने दोनों टैंकरों पर सटीक हथियार दागकर उन्हें चलने लायक नहीं छोड़ा। ईरान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिका के इन रात के हमलों की कड़ी निंदा की और इसे आठ अप्रैल के युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया।
कूटनीति हमेशा सबसे पहले प्रभावित होती
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका पर लापरवाह सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया और कहा कि जब कूटनीतिक समाधान मौजूद है तब ऐसी कार्रवाई गलत है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ईरानी लोग कभी दबाव के आगे नहीं झुकते और कूटनीति हमेशा सबसे पहले प्रभावित होती है। लॉन्चर क्षमता अब 120 प्रतिशत तक पहुंच गई उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की मिसाइल क्षमता और लॉन्चर क्षमता अब 120 प्रतिशत तक पहुंच गई है
जो अमेरिकी खुफिया अनुमान से भी ज्यादा है। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास दो ईरानी जहाजों पर हमला किया और दक्षिणी शहरों व राजधानी तेहरान पर भी हवाई हमले किए, जिसमें कुछ क्षेत्रीय देशों की मदद ली गई।