Pezeshkian Departs for India: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार को तेहरान से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। भारत आने से पहले उन्होंने BRICS की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि BRICS के पास एकतरफा नीतियों का मुकाबला करने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक, औद्योगिक और वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने की बड़ी क्षमता है।
एकतरफा नीतियों का मुकाबला करना मकसद
पेजेशकियान ने कहा कि BRICS का प्रमुख उद्देश्य देशों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखते हुए आर्थिक और व्यापारिक संबंध मजबूत करने का अवसर देना है। उन्होंने बताया कि BRICS देशों में दुनिया की 45 प्रतिशत से ज्यादा आबादी रहती है और इनके पास वैश्विक भूभाग का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा है। उनके मुताबिक इन देशों के पास कई क्षेत्रों में विकास की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।
डॉलर पर निर्भरता कम करने की वकालत
ईरानी राष्ट्रपति ने आर्थिक लेन-देन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाने पर भी जोर दिया। उन्होंने BRICS बैंक और सदस्य देशों के बीच संयुक्त निवेश जैसी व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देशों को बिना डॉलर पर निर्भर हुए अपने आर्थिक और क्षेत्रीय विकास के रास्ते तलाशने चाहिए। उन्होंने बड़ी शक्तियों के एकतरफा फैसलों और जरूरत से ज्यादा दबाव का विरोध करने की बात भी कही।
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भारत के साथ रिश्तों को बताया अहम
पेजेशकियान ने भारत और ईरान के पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया। उनका कहना है कि BRICS सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, ब्राजील और अन्य देशों के नेताओं की मौजूदगी से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
BRICS को मजबूत करने पर जोर
जब पेजेशकियान से पूछा गया कि BRICS एकतरफा नीतियों का कितना प्रभावी तरीके से मुकाबला कर सकता है, तो उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर इस समूह का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था काफी जटिल हो चुकी है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कुछ शक्तियों के बढ़ते दबदबे से निपटने के लिए नए तरीकों की जरूरत है। उनके मुताबिक सदस्य देशों के बीच सहयोग और नवाचार बढ़ने से BRICS मजबूत होगा और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में एकतरफा रवैये को कम करने में मदद मिलेगी।