IRCTC Food Trend : भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों जैसे वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी और दूरंतो एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों के बीच एक नया ट्रेंड तेजी से देखने को मिल रहा है। अब बड़ी संख्या में यात्री टिकट बुक करते समय रेलवे के भोजन विकल्प को नहीं चुन रहे हैं। पहले इन ट्रेनों में भोजन टिकट का अनिवार्य हिस्सा माना जाता था, लेकिन अब यात्रियों को इसे लेने या छोड़ने की सुविधा मिल चुकी है। इसी बदलाव के बाद भोजन नहीं लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
IRCTC ने क्या बताया?
आईआरसीटीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राहुल हिमालयन ने कंपनी की पहली तिमाही के नतीजों के दौरान इस मुद्दे पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रीमियम ट्रेनों में भोजन से बाहर रहने वाले यात्रियों की संख्या लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह आंकड़ा प्रारंभिक अनुमान है और इसकी अलग से पुष्टि की जाएगी। इसके बावजूद यह साफ है कि पहले की तुलना में ज्यादा यात्री भोजन का विकल्प छोड़ रहे हैं।
क्या सिर्फ गुणवत्ता है वजह?
कई यात्रियों का मानना रहा है कि भोजन की गुणवत्ता में गिरावट के कारण लोग रेलवे का खाना नहीं लेना चाहते। कुछ साल पहले तक भोजन टिकट के साथ अनिवार्य रूप से शामिल रहता था, लेकिन शिकायतें बढ़ने के बाद रेलवे ने यात्रियों को विकल्प दिया कि वे भोजन लें या न लें। इसके बाद कई लोगों ने भोजन से दूरी बनानी शुरू कर दी। हालांकि आईआरसीटीसी का कहना है कि केवल गुणवत्ता ही इसकी वजह नहीं है।
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बढ़े हैं खाने के दूसरे विकल्प
रेल यात्रियों के पास अब खाने के कई दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं। ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाओं और स्टेशन आधारित कैटरिंग नेटवर्क के कारण यात्री अपनी पसंद का भोजन ट्रेन में मंगवा सकते हैं। यही वजह है कि कई लोग टिकट बुक करते समय रेलवे का भोजन नहीं चुनते और बाद में अपनी पसंद का खाना ऑर्डर कर लेते हैं। इससे यात्रियों को ज्यादा विकल्प और सुविधा दोनों मिल रही हैं।
शिकायतों के आंकड़े क्या कहते हैं?
आईआरसीटीसी के अनुसार हर साल लगभग 58 करोड़ भोजन यात्रियों को परोसे जाते हैं। यानी प्रतिदिन करीब 18 लाख मील सर्व किए जाते हैं। इसके मुकाबले शिकायतों की संख्या बेहद कम बताई गई है। कंपनी का दावा है कि रोजाना मिलने वाली शिकायतें कुल सेवा के मुकाबले बहुत कम प्रतिशत हैं। कई शिकायतें भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी नहीं होतीं, बल्कि अतिरिक्त सुविधाओं या कर्मचारियों के व्यवहार से संबंधित होती हैं।
ई-पैंट्री पर रेलवे का जोर
यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए रेलवे और आईआरसीटीसी ई-पैंट्री व्यवस्था को तेजी से बढ़ा रहे हैं। इस सुविधा के तहत यात्री ट्रेन में मौजूद कैटरिंग सेवा से मोबाइल ऐप या क्यूआर कोड के जरिए भोजन मंगवा सकते हैं। फिलहाल यह व्यवस्था 50 से अधिक ट्रेनों में लागू की जा चुकी है और जल्द ही करीब 100 ट्रेनों तक इसका विस्तार करने की योजना है। रेलवे का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, ओवरचार्जिंग रुकेगी और यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सकेगी।