लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुरानी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का काम तेज किया गया है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रमुख बैराजों, बांधों और नियामकों के खराब द्वार बदलने का काम किया है।
प्रमुख सचिव अनिल गर्ग के अनुसार लखनऊ के गोमती बैराज के सभी 10 और गाजियाबाद के हिंडन बैराज के आठों द्वार बदले जा चुके हैं। ओखला बैराज के 27 में से 18 और नरौरा बैराज के 61 में से 13 द्वार बदले गए हैं, जबकि 48 पर काम जारी है। पीलीभीत के चुक्का हेड नियामक के चारों तथा एटा के तातारपुर के 20 द्वार भी बदले गए हैं।
विभाग ने ललितपुर के माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक नियामक और कचनौदा बांध में 60 से 70 फीट गहराई पर पानी के भीतर द्वार बदलने का काम किया। चंदौली के चंद्रप्रभा बांध में करीब 80 फीट नीचे रिसाव भी गोताखोरों की मदद से रोका गया।