Bageshwar Dham: बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। इसका कारण है उनकी वह रहस्यमयी शक्ति, जिसके जरिए वे बिना किसी से सवाल पूछे ही उसके जीवन की समस्याएं, नाम और व्यक्तिगत बातें जान लेते हैं। कई लोग मानते हैं कि यह शक्ति उन्हें ‘कर्ण पिशाचिनी विद्या’ के माध्यम से प्राप्त हुई है, जो तंत्र साधना की एक रहस्यमयी और कठिन विधा मानी जाती है।
जानें क्या है मान्यता?
कर्ण पिशाचिनी विद्या एक ऐसी तांत्रिक साधना है, जिसके अनुसार एक विशेष आत्मा साधक के कान में रहकर उसे आवश्यक जानकारी देती है। मान्यता है कि यह आत्मा कान में फुसफुसाकर हर सवाल का जवाब देती है। यह साधना न केवल कठिन मानी जाती है, बल्कि इसके लिए विशेष नियमों और ब्रह्मचर्य का पालन आवश्यक होता है। इसे पाने के लिए साधकों को श्मशान जैसे स्थानों पर विशेष मंत्रों का जप करना होता है। धीरेंद्र शास्त्री पर आरोप और चर्चाएं दोनों हैं—कुछ लोग उन्हें चमत्कारी संत मानते हैं, तो कुछ इसे एक पूर्व नियोजित कार्यक्रम करार देते हैं। हालांकि, शास्त्री स्वयं कहते हैं कि यह सब ईश्वर की कृपा और गुरुओं की साधना का फल है।
आस्था और चमत्कार का संगम
इस पूरे रहस्य के केंद्र में है लोगों की आस्था। विज्ञान इसे तर्क से देखता है, जबकि भक्त इसे आस्था और चमत्कार का नाम देते हैं। लेकिन यह तय है कि धीरेंद्र शास्त्री की लोकप्रियता और उनके "दिव्य दरबार" की शक्ति का राज अब भी अनसुलझा है। क्या यह सचमुच कर्ण पिशाचिनी की कृपा है, या महज एक कुशल मानसिक तकनीक? यह सवाल आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
नोट: लोकसत्य ऐसे किसी भी चमत्कार की पुष्टि नहीं करता है. खबर पाठकों की जानकारी महज के लिए पब्लिस की गई है..