Ishan Kishan Captaincy : एक समय ऐसा था जब ईशान किशन को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा था। टीम इंडिया के तीनों प्रारूपों में जगह बनाने वाले इस विकेटकीपर बल्लेबाज का करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था। लेकिन फिर हालात अचानक बदल गए। टीम से दूरी बढ़ी, बीसीसीआई का केंद्रीय अनुबंध हाथ से निकल गया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दरवाजे लगभग बंद हो गए। हालांकि यही दौर ईशान के करियर का सबसे बड़ा मोड़ भी साबित हुआ।
जब करियर पर उठने लगे सवाल
2023 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने के बाद ईशान लगातार चर्चा में थे। लेकिन दक्षिण अफ्रीका दौरे के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। घरेलू क्रिकेट से दूरी और चयन से जुड़े विवादों के बीच वह टीम इंडिया की योजनाओं से बाहर हो गए। इसके बाद बीसीसीआई ने भी उनका केंद्रीय अनुबंध समाप्त कर दिया। कुछ महीने पहले तक जो खिलाड़ी भविष्य का बड़ा सितारा माना जा रहा था, वह अचानक राष्ट्रीय टीम से दूर हो चुका था।
झारखंड की कप्तानी बनी टर्निंग प्वाइंट
टीम इंडिया से बाहर होने के बाद ईशान ने घरेलू क्रिकेट में वापसी की। यहीं उन्हें झारखंड की कप्तानी मिली और यही जिम्मेदारी उनके करियर का सबसे बड़ा बदलाव लेकर आई। कप्तानी ने उन्हें सिर्फ बल्लेबाज नहीं, बल्कि एक लीडर की तरह सोचने की सीख दी। अब उनका ध्यान केवल अपने प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि पूरी टीम के खेल और खिलाड़ियों के विकास पर भी रहने लगा।
बदली सोच, बदला खेल
ईशान का कहना है कि कप्तानी ने उन्हें ज्यादा जिम्मेदार और शांत बनाया। पहले उनकी सोच बड़े शॉट और तेज रन बनाने तक सीमित रहती थी, लेकिन अब वह टीम की जरूरत के हिसाब से खेलने पर जोर देते हैं। उन्होंने महसूस किया कि एक वरिष्ठ खिलाड़ी के तौर पर टीम को आगे बढ़ाना भी उनकी जिम्मेदारी है। यही बदलाव उनकी बल्लेबाजी में भी साफ दिखाई देने लगा।
घरेलू क्रिकेट में किया जोरदार कमबैक
नई सोच का असर जल्द ही मैदान पर दिखा। रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में झारखंड को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। पूरे टूर्नामेंट में 517 रन बनाकर उन्होंने खुद को फिर से चर्चा में ला दिया। लगातार अच्छे प्रदर्शन की बदौलत टीम इंडिया के दरवाजे भी दोबारा खुलने लगे और उनकी वापसी की राह आसान हो गई।
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270 रन की पारी ने दिया बड़ा संदेश
दलीप ट्रॉफी फाइनल में खेली गई 270 रन की ऐतिहासिक पारी सिर्फ एक बड़ा स्कोर नहीं थी, बल्कि ईशान के बदले हुए व्यक्तित्व की कहानी भी थी। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले ईशान ने इस बार धैर्य, समझ और जिम्मेदारी का परिचय दिया। उन्होंने टीम की जरूरत को प्राथमिकता दी और लंबी पारी खेलकर साबित कर दिया कि अब उनका खेल पहले से कहीं ज्यादा परिपक्व हो चुका है। टीम इंडिया से दूरी और कप्तानी की जिम्मेदारी ने जिस ईशान किशन को गढ़ा, उसकी झलक इस दोहरे शतक में साफ दिखाई दी।