इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट ने रविवार को कहा कि ईरान के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान धीरे-धीरे वहां के शासन की पकड़ को कमजोर कर रहा है। उनका दावा है कि लगातार हमलों से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) कमजोर हो रही है और इससे ईरानी जनता को अपना भविष्य तय करने का अवसर मिलेगा। मीडिया को दिए साक्षात्कार में बेनेट ने कहा, “हमारे पास शासन और आईआरजीसी को कमजोर करने के लिए कई लक्ष्य हैं। हम उस पूरे आतंकी तंत्र को घेर रहे हैं जो अपने ही लोगों को आतंकित करता है।”
लहर का उद्देश्य नेतृत्व को हटाना था
बेनेट ने बताया कि सैन्य अभियान का शुरुआती चरण शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने पर केंद्रित था। उन्होंने कहा, “पहली लहर का उद्देश्य नेतृत्व को हटाना था।” उनका कहना था कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली को कमजोर करने के बाद अब व्यापक सुरक्षा ढांचे को ध्वस्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं।
जंजीरों को तोड़ना ईरानी जनता के हाथ में है
उन्होंने कहा, “जब आप कमांड और संचालन के मुख्य केंद्रों पर प्रहार करते हैं, तो आप पूरे तंत्र को कमजोर कर देते हैं। ईरानी जनता पर जो दमन की जंजीरें हैं, हम उन्हें कमजोर कर रहे हैं। लेकिन अंततः उन जंजीरों को तोड़ना ईरानी जनता के हाथ में है।”
सटीक लक्ष्य शासन परिवर्तन नहीं था
बेनेट ने जोर देकर कहा कि इज़रायल का उद्देश्य शासन परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मरक्षा है। उन्होंने कहा, “इज़रायल का सटीक लक्ष्य शासन परिवर्तन नहीं था। हमारा लक्ष्य अपनी रक्षा करना और उस भयानक खतरे को खत्म करना है जो लंबे समय से हमारे सिर पर मंडरा रहा था,” उन्होंने कहा।
मिसाइलें और परमाणु हथियार हो सकते थे
उन्होंने दावा किया कि अगर अभी कार्रवाई नहीं की जाती, तो ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें, अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलें और परमाणु हथियार हो सकते थे, जो इज़रायल, यूरोप और अमेरिका को निशाना बना सकते थे।