ईरान के साथ जारी तनाव के बीच इजरायल ने बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि वह जमीनी कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा। इजरायल ने कहा है कि उसकी सेना ईरान की जमीन पर नहीं जाएगी और वह केवल हवाई और समुद्री अभियानों तक सीमित रहेगा।
अमेरिका के लिए बढ़ी मुश्किलें
इजरायल के इस फैसले को अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करता है, तो उसे यह मिशन अकेले ही पूरा करना पड़ सकता है। इससे अमेरिका पर सैन्य और रणनीतिक दबाव काफी बढ़ सकता है।
सीमाओं और हिजबुल्लाह पर फोकस
रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायल ने यह फैसला अपनी सीमाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। खासतौर पर दक्षिणी लेबनॉन में सक्रिय हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रहे अभियान पर वह ज्यादा ध्यान देना चाहता है, जिससे उसकी प्राथमिकताएं स्पष्ट हो गई हैं।
अमेरिकी तैयारी और संकेत
इसी बीच खबरें हैं कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती और रणनीतिक तैयारी इस बात की ओर इशारा करती है कि वॉशिंगटन सभी विकल्प खुले रखे हुए है और किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता है।
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ट्रंप के फैसले पर टिकी नजरें
अब सबकी नजर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर टिकी है। यह अभी तय नहीं हुआ है कि अमेरिका जमीनी कार्रवाई करेगा या नहीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा कदम जोखिम भरा हो सकता है और लंबे समय तक सैन्य मौजूदगी की जरूरत पड़ सकती है।
आगे क्या हो सकता है
हालात लगातार बदल रहे हैं और अनिश्चितता बनी हुई है। अगर अमेरिका अकेले आगे बढ़ता है तो यह संघर्ष और लंबा खिंच सकता है। फिलहाल यह साफ है कि इजरायल के फैसले ने पूरे समीकरण को बदल दिया है और आने वाले दिन बेहद अहम रहने वाले हैं।