इजरायल की राजनीति में अरब मतदाताओं को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। देश के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को स्पष्ट संदेश देते हुए अरब समुदाय के वोटों पर सवाल उठाने से बचने की नसीहत दी है। उन्होंने चुनावी नतीजों को स्वीकार करते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों का सम्मान करने पर जोर दिया है।
राष्ट्रपति के इस रुख को नेतन्याहू की चुनावी राजनीति और अरब मतदाताओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम ने इजरायल में चुनावी पारदर्शिता, राजनीतिक बयानबाजी और अरब समुदाय की भागीदारी को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
चुनाव आयोग की जांच में नहीं मिला धांधली का सबूत
इजरायल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव हुए थे। इन चुनावों में नेतन्याहू के धार्मिक-राष्ट्रवादी गठबंधन को बहुमत नहीं मिल सका, जबकि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। इसके बाद नेतन्याहू और उनकी पार्टी लिकुड की ओर से चुनाव में धांधली और विदेशी हस्तक्षेप के आरोप लगाए गए थे। उनका दावा था कि अरब पार्टियों ने बाहरी मदद के जरिए चुनावी नतीजों को प्रभावित किया है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए।
9,069 मतदान केंद्रों का ऑडिट किया
इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने इन शिकायतों की जांच के बाद साफ किया कि चुनाव की निष्पक्षता या नतीजों को प्रभावित करने वाली किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं मिला है। आयोग ने करीब 9,069 मतदान केंद्रों का ऑडिट किया। जांच के बाद आयोग ने कहा कि घोषित नतीजे मतदाताओं की वास्तविक इच्छा को दर्शाते हैं।
अरब मतदाताओं के समर्थन में क्या कहा?
राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने चुनावी नतीजों को कानूनी रूप से बाध्यकारी मानते हुए आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। उन्होंने अरब समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाने वाली बयानबाजी पर भी नाराजगी जताई।