मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के शोभापुर गांव के युवा अभिज्ञान पुरोहित ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की परीक्षा में देशभर में दूसरी रैंक हासिल कर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। ‘साइंटिस्ट इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग’ पद पर उनका चयन हुआ है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के शीर्ष वैज्ञानिक संस्थान तक पहुंचने की यह कहानी पूरे प्रदेश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई है।
बचपन में जगी अंतरिक्ष की रुचि
अभिज्ञान पुरोहित की वैज्ञानिक बनने की यात्रा की शुरुआत नवोदय विद्यालय, पावरखेड़ा से हुई। उड़ीसा के एक अंतरिक्ष केंद्र के शैक्षणिक दौरे ने उनके मन में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर गहरी रुचि पैदा की, जिसने उनके करियर की दिशा तय कर दी।
परिवार का मजबूत समर्थन बना ताकत
अभिज्ञान के पिता राजेश पुरोहित शिक्षक और माता पियूष पुरोहित शिक्षिका हैं। शिक्षा के माहौल में पले-बढ़े अभिज्ञान को परिवार से निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिला, जिसने उन्हें कठिन लक्ष्य हासिल करने में मदद की।
ISRO परीक्षा में शानदार प्रदर्शन
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अभिज्ञान ने ISRO की परीक्षा में ऑल इंडिया सेकेंड रैंक हासिल की। उनका चयन ‘साइंटिस्ट इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग’ के पद पर हुआ है, जिसे उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम माना जा रहा है।
देश की सुरक्षा में योगदान का सपना
अभिज्ञान ने अपने भविष्य के विजन में कहा है कि वे इसरो में ऐसे तकनीकी नवाचार करना चाहते हैं, जिससे भारत की सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक को और मजबूती मिले। उनका लक्ष्य देश को वैज्ञानिक क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।
क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल
इस उपलब्धि के बाद शोभापुर गांव और पूरे नर्मदापुरम जिले में जश्न का माहौल है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई दी है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाने की यह कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।