ISRO Gaganyaan Mission Update: अंतरिक्ष तक पहुंचना जितना चुनौतीपूर्ण है, उससे कहीं ज्यादा कठिन काम वहां से सुरक्षित धरती पर लौटना होता है। यही कारण है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के हर चरण को बेहद सावधानी और तकनीकी सटीकता के साथ आगे बढ़ा रहा है। इसी क्रम में ISRO ने दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण इस बात की पुष्टि करता है कि अंतरिक्ष से लौटते समय हमारे जांबाज अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से धरती पर कदम रखेंगे।
सुरक्षित वापस लाने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा
इस परीक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब अपने अंतरिक्ष यात्रियों को न केवल अंतरिक्ष में भेजने, बल्कि उन्हें सुरक्षित वापस लाने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस सफलता के पीछे महीनों की तैयारी और सटीक इंजीनियरिंग है।
ISRO को बधाई दी
वहीं, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी इस उपलब्धि को गगनयान मिशन के लिए बड़ा मील का पत्थर बताया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट ISRO को हार्दिक बधाई दी। उनका कहना है कि इस तरह के सफल परीक्षण भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी के और करीब ले जा रहे हैं, जो मानव अंतरिक्ष उड़ान और सुरक्षित वापसी दोनों में सक्षम हैं।
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क्या था यह परीक्षण
जब गगनयान अंतरिक्ष से वापस लौटेगा, तो वायुमंडल में प्रवेश करते समय उसकी गति हजारों किलोमीटर प्रति घंटा होगी। समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग के लिए इस गति को कम करना सबसे चुनौतीपूर्ण काम है। इस टेस्ट के दौरान एक डमी क्रू मॉड्यूल को ऊंचाई से गिराया गया। जैसे ही मॉड्यूल नीचे गिरा, उसके मुख्य पैराशूटों ने एक-एक कर पूरी सटीकता के साथ काम किया और मॉड्यूल को सुरक्षित रूप से नीचे उतारा। इस टेस्ट की सफलता से यह साबित हुआ कि पूरा सिस्टम तय क्रम में सही तरीके से काम कर रहा है।
कहां किया गया परीक्षण
आपको बता दें कि इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) सफलतापूर्वक संपन्न किया। यहां से भारत के कई ऐतिहासिक मिशन लॉन्च हुए हैं। गगनयान के लिए यह टेस्ट इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें इंसानों की जान जुड़ी है।