साल 2030 अंतरिक्ष इतिहास में एक बड़ा मोड़ लेकर आने वाला है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी ISS अपनी सेवाएं पूरी कर धरती पर वापस लौटेगा। नवंबर 2000 से अब तक यह स्टेशन लगातार इंसानों की मौजूदगी का गवाह रहा है। फुटबॉल मैदान के आकार का यह स्टेशन हर सेकंड करीब 8 किलोमीटर की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता रहा। अब इसके रिटायरमेंट के साथ अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक लंबा अध्याय खत्म होने जा रहा है।
क्यों खत्म किया जा रहा है ISS
ISS अब तकनीकी रूप से बूढ़ा हो चुका है। इसके कई सिस्टम पुराने पड़ चुके हैं और रखरखाव महंगा होता जा रहा है। नासा ने फैसला किया है कि 2030 में स्पेसएक्स की मदद से ISS को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कराया जाएगा। इसे प्रशांत महासागर के सबसे सुनसान हिस्से ‘पॉइंट नेमो’ में गिराया जाएगा, जहां पहले भी अंतरिक्ष मलबे गिराए जाते रहे हैं।
ISS के बाद अंतरिक्ष में कौन बचेगा
ISS के हटते ही लो-अर्थ ऑर्बिट में केवल चीन का स्पेस स्टेशन ‘तियांगोंग’ सक्रिय रहेगा। इसका मतलब है कि कुछ समय के लिए अंतरिक्ष में स्थायी मानव मौजूदगी का पूरा नियंत्रण चीन के पास होगा। अमेरिका और उसके सहयोगी देश अब सरकारी स्टेशनों की बजाय निजी स्पेस स्टेशनों पर दांव लगा रहे हैं। कई कंपनियां भविष्य के कमर्शियल स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी में हैं।
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निजी स्पेस स्टेशनों का नया दौर
2030 के बाद अंतरिक्ष पूरी तरह से व्यावसायिक मॉडल पर आगे बढ़ेगा। जैसे आज सैटेलाइट और रॉकेट निजी कंपनियां चलाती हैं, वैसे ही स्पेस स्टेशन भी प्राइवेट होंगे। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारें पूरी तरह पीछे नहीं हटेंगी। वे अपने अंतरिक्ष यात्रियों और वैज्ञानिक मिशनों के लिए इन निजी स्टेशनों का इस्तेमाल करती रहेंगी।
भारत का बड़ा सपना: अपना स्पेस स्टेशन
इस बदलते दौर में भारत भी पीछे नहीं है। इसरो ने 2035 तक भारत का खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने का लक्ष्य रखा है। योजना के तहत 2028 तक पहले मॉड्यूल BAS-1 को लॉन्च किया जाएगा। यह स्टेशन ISS से छोटा होगा, जिसमें 2 से 4 अंतरिक्ष यात्री करीब 15 से 20 दिन तक रह सकेंगे। इसे पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर स्थापित किया जाएगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मिशन
भारत का अपना स्पेस स्टेशन होना रणनीतिक और वैज्ञानिक दोनों नजरिए से बेहद जरूरी है। इससे माइक्रोग्रैविटी रिसर्च के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भरता खत्म होगी। गगनयान मिशन इस स्टेशन की नींव है और स्पेस डॉकिंग जैसी तकनीकों पर काम शुरू हो चुका है। भविष्य में यही स्टेशन भारत के चंद्रमा मिशन के लिए ट्रेनिंग और तैयारी का बेस बनेगा। ISS भले जा रहा हो, लेकिन भारत अब अंतरिक्ष में अपनी स्थायी जगह बनाने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।