मेरठ। नीले ड्रम कांड में जिला जज द्वारा दिए गए फैसले की चारों और भूरी-भूरी प्रशंसा हो रही है। अधिवक्ता से लेकर आम जनता मुस्कान और उसके प्रेमी को साहिल को मृत्युदंड की सजा देने पर खुश है। इस ऐतिहासिक फैसले को सुनाने के दौरान अदालत ने अपराध और सजा के संबंध में धर्म का उल्लेख किया और कहा, अधर्म के काम पर सजा देना धर्म होता है।
मुस्कान-साहिल आप दोनों ने ही सौरभ की नृशंस हत्या की है। इसलिए माफी स्वीकार नहीं होगी और आपको मृत्यु दंड की सजा सुनाई जाती है। जजमेंट आने से पहले अभियोजन पक्ष और पुलिस ने कोर्ट में प्रभावी पैरवी की थी और 1000 हजार पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी और 589 दिनों में 126 तारीख लगी। सुनवाई के दौरान पुलिस और अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 गवाहों के बयान कराए थे और तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध कराए थे।
गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर ही बुधवार को यह ऐतिहासिक फैसला जिला जज ने सुनाया है। सजा सुनाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया था। मुस्कान रस्तोगी और साहिल फूट-फूटकर रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा, तुम अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या में दोषी हो, क्या सजा चाहती हो? उसने जवाब दिया, मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए। फिर वह खामोश हो गई। इसके बाद साहिल से यही सवाल पूछा गया, तो वह चुप रहा और जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई। सजा सुनाने से पहले अदालत ने अपराध और सजा के संबंध में धर्म का उल्लेख किया और कहा, अधर्म के काम पर सजा देना धर्म होता है। मुस्कान-साहिल आप दोनों ने ही सौरभ की नृशंस हत्या की है। इसलिए माफी स्वीकार नहीं होगी।
एक नजर गवाहों और तकनीकी साक्ष्यों पर
जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने बताया, मुकदमे की सुनवाई जिला जज की अदालत में 589 दिनों लगे, जिसमें 126 तारीख 22 गवाहों के बयान अदालत में कराए गए। सुनवाई के दौरान ऑपरेशन कन्विकशन के दौरान ब्रह्मपुरी थाना प्रभारी राजेश काम्बोज, कांस्टेबल दिलशाद अहमद एवं कोर्ट पैरोकार और कांस्टेबल प्रशान्त कुमार एवं कोर्ट मोहर्रिर, डीजे कोर्ट ने नियत तिथि पर गवाहों के बयान दर्ज कराए और तकनीकी साक्ष्य भी कोर्ट में उपलब्ध कराए।
किस गवाह ने अदालत में क्या कहा
गवाह नंबर 1 : भाई से संपर्क न होने पर गहराया शक
18 मार्च 2025 को ब्रह्मपुरी थाने में उसने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनके भाई सौरभ ने मुस्कान से प्रेम विवाह किया था। सौरभ ने उसे बताया था कि वर्ष 2019 से उसकी पत्नी मुस्कान रस्तौगी के साहिल शुक्ला से संबंध हैं। उसने यह भी कहा था कि उसे अपनी जान का खतरा है। सौरभ बेटी पीहू का जन्मदिन मनाने विदेश से मेरठ आया था। इसी दौरान पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने उसकी हत्या कर दी। मैंने सौरभ से संपर्क का प्रयास किया था। संपर्क न होने पर मुझे हत्या का शक होने लगा था।
-बबलू कुमार (वादी सौरभ का बड़ा भाई)
गवाह नंबर 2 : साहिल से मिलती थी मुस्कान
सौरभ ने हमारी मर्जी के खिलाफ मोहल्ले की मुस्कान से शादी की थी। ससुराल में मुस्कान का व्यवहार बहुत खराब था। उन्हें पता चला कि सौरभ के लंदन जाने के बाद वह साहिल से मिलती थी। वह सौरभ से विवाह के बाद भी एक बार घर और बेटी को छोड़कर जा चुकी थी।
-रेणु देवी (सौरभ की मां
गवाह नंबर 3 :तीन मार्च की रात प्रेमी को घर में दाखिल होते देखा
तीन मार्च की रात मैंने साहिल को सौरभ के घर जाते देखा था। उस वक्त घर पर सौरभ और मुस्कान मौजूद थे। बाद में पता चला कि उसी रात साहिल और मुस्कान ने मिलकर सौरभ की हत्या कर दी और शव को नीले ड्रम में छिपा दिया।
-सौरभ (पड़ोसी और सौरभ के बचपन का दोस्त)
गवाह नंबर 4 : ब्रह्मपुरी में नीले ड्रम से मिला था सुराग
मैंने ब्रह्मपुरी स्थित मकान में नीले ड्रम में शव मिलने की तहरीर दर्ज की थी। बाद में सौरभ के भाई की तहरीर पर मुस्कान के प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति की हत्या करने और शव के टुकड़े कर ड्रम में छिपाने की बात सामने आई।
-बृजेश कुमार (कांस्टेबल)
गवाह नंबर 5 : फल काटने का बहाने बनाकर खरीदा चाकू और उस्तरा
एक लड़की मेरी दुकान पर सब्जी और फल काटने के बहाने चाकू और उस्तरा खरीदने आई थी। बाद में अखबार में फोटो देखकर मैंने उसे पहचाना कि वह मुस्कान ही थी।
-राकेश कुमार (चाकू विक्रेता)
गवाह नंबर 6 : अनाज के बहाने खरीदा था नीला ड्रम
मुस्कान और साहिल मेरी दुकान से अनाज रखने का बहाना बनाकर 1200 लीटर का नीला प्लास्टिक ड्रम खरीदकर ई-रिक्शा में ले गए थे। समाचार पत्र में फोटो देखकर मैंने दोनों को पहचाना।
-सैफुद्दीन (नीला ड्रम विक्रेता)
गवाह नंबर 7 : शव को छिपाने के लिए खरीदी बालू और सीमेंट
एक लड़का और लड़की ई-रिक्शे से आए थे और बालू व सीमेंट खरीदकर ले गए थे। बाद में समाचारों से स्पष्ट हुआ कि वे मुस्कान और साहिल ही थे।
-अक्षय शर्मा (सीमेंट व्यापारी)
गवाह नंबर 8 : कभी नहीं लिखी नशीली दवा
मुस्कान बुखार और कमजोरी का इलाज कराने आई थी। मैंने उसे सामान्य दवाएं दी थीं। मुस्कान के पर्चे पर उन्होंने नशीली दवा नहीं लिखी।
-डॉ. अरविंद कुमार देशवाल (चिकित्सक)
गवाह नंबर 9 : डॉक्टर के पर्चे पर दी गई थी नशीली दवा
एक लड़की डॉक्टर देशवाल के पर्चे पर नशीली व अन्य दवाएं लेने आई थी। मैंने पर्चा देखकर दवा दी। वारदात के खुलासे के बाद फोटो देखकर पहचाना कि वह मुस्कान थी।
-अमित जोशी (उषा मेडिकल स्टोर संचालक)
गवाह नंबर 10 : ड्रम काटते ही निकले सीमेंट में जमे शव के टुकड़े
पुलिस ने मुझे मोर्चरी बुलाकर नीला ड्रम काटने को कहा था। ड्रम काटने पर उसमें से सीमेंट, तकिए के खोल, एक सिरकटी लाश, दो हाथ के पंजे, उस्तरा और चाकू बरामद हुए। वह शव सौरभ का था।
-अशोक कुमार (ड्रम काटने वाला कारीगर)
गवाह नंबर 11 : नीले ड्रम में सीमेंट में जमे मिले थे शव के टुकड़े
ब्रह्मपुरी स्थित मकान में नीले ड्रम के अंदर सीमेंट में जमे सौरभ के शव के टुकड़े मिले थे। ड्रम कटवाने पर शव तीन टुकड़ों (सिर और हाथ के पंजे अलग) में मिला। सीमेंट में दबने के कारण शव सफेद पड़ चुका था।
-धर्मेंद्र कुमार (पंचनामा भरने वाला दरोगा )
गवाह नंबर 12 : हत्या से पहले दिया गया था जहर, छाती पर चाकू के निशान
सौरभ के हाथ के पंजे और सिर धड़ से अलग थे। छाती पर चाकू से वार के तीन गहरे निशान थे। मृत्यु से पूर्व उसे नशीला पदार्थ खिलाया गया था और शरीर पर कई धारदार चोटों के निशान थे।
-डॉ. दिनेश सिंह चौहान (पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर)
गवाह नंबर 13 : मेरी कैब से गए थे मुस्कान और साहिल
हत्या के बाद मुस्कान और साहिल मेरी कैब से कसोल, मनाली और मसूरी घूमने गए थे। दोनों खुद को पति-पत्नी बताते थे। 19 मार्च को अखबार में फोटो देखकर मुझे सच्चाई का पता चला।
-अजब सिंह (कैब ड्राइवर)
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गवाह नंबर 14 : महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्यों की बरामदगी और विवेचना
मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए घटनास्थल व आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग किया गया और अन्य बरामद सामान को सील कर कोर्ट के समक्ष पेश किया गया।
-रमाकांत पचौरी (निरीक्षक / विवेचक)
गवाह नंबर 15 : सिम की लोकेशन और कॉल डिटेल
पुलिस की मांग पर आरोपियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) और टावर लोकेशन डाटा अदालत को साक्ष्य के रूप में प्रदान किया गया।
-लोकेश कुमार (नोडल अधिकारी, रिलायंस जियो)
कोर्ट में करीब 17 महीने का घटनाक्रम
12 मई 2025- पुलिस ने करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें 34 गवाहों का जिक्र था, 22 की हुई गवाही।
17 जून 2025- मुस्कान और साहिल पर हत्या और सबूत मिटाने के आरोप तय हुए। ट्रायल शुरू हुआ।
4 जुलाई 2025- सौरभ के भाई बबलू की कोर्ट में गवाही दी।
10 जुलाई से नवंबर 2025- परिवार, पुलिस, डॉक्टर, चाकू और ड्रम बेचने वाले समेत कई गवाहों के बयान दर्ज हुए।
19 दिसंबर 2025- कोर्ट में नीला ड्रम और ट्राली बैग बतौर सबूत पेश किए गए।
21 अप्रैल 2026- कोर्ट ने मुस्कान और साहिल से आरोपों को लेकर 32-32 सवाल किए। दोनों ने आरोपों से इनकार किया।
22 मई 2026- मामले में अंतिम बहस शुरू हुई। अभियोजन ने 22 गवाहों के बयानों का हवाला दिया।
21 अगस्त 2026- मुस्कान और साहिल के वकीलों ने कोर्ट में अंतिम बहस शुरू की।
17 सितंबर 2026- अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस पूरी हुई।
30 सितंबर 2026- कोर्ट ने मुस्कान और साहिल दोषी करार दिया।
14 अक्टूबर 2026- कोर्ट ने मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाई