गर्भावस्था के अंतिम त्रैमास में खुजली क्यों होती है? गर्भावस्था एक महिला के जीवन का बेहद खूबसूरत और संवेदनशील दौर होता है. जैसे-जैसे माँ बनने का समय नज़दीक आता है, शरीर में कई तरह के बदलाव तेज़ी से होने लगते हैं। इन्हीं बदलावों में से एक है त्वचा में खुजली होना, खासकर आख़िरी त्रैमास (7वें से 9वें महीने) में। बहुत-सी महिलाएँ इस समस्या का अनुभव करती हैं और अक्सर सोचती हैं कि क्या यह सामान्य है या किसी गंभीर समस्या का संकेत। सच यह है कि गर्भावस्था के आखिरी महीनों में खुजली एक आम समस्या है, पर इसके कारणों को समझना और सावधानियाँ अपनाना ज़रूरी है.
गर्भावस्था के आखिरी चरण
गर्भावस्था के आखिरी चरण में शरीर तेजी से फैलता है, विशेषकर पेट और स्तनों का क्षेत्र. जब त्वचा खिंचती है, तो उसकी ऊपरी परतें पतली होने लगती हैं और नमी कम हो जाती है. इसी कारण त्वचा सूखकर खुरदरी हो सकती है, जिससे खुजली महसूस होती है. यह खुजली कभी-कभी हल्की होती है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह अधिक परेशान करने वाली भी हो सकती है. साथ ही, हार्मोनल बदलाव भी शरीर की संवेदनशीलता को बढ़ा देते हैं, जिससे सामान्य से अधिक खुजली महसूस हो सकती है.
तापमान में बढ़ोतरी
इसके अलावा, गर्भावस्था में खून के प्रवाह और शरीर के तापमान में बढ़ोतरी होती है. जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, पेट की त्वचा दबाव में आती है और पसीना भी अधिक बनने लगता है। यह स्थिति त्वचा को और अधिक सूखा या चिपचिपा बना सकती है, जो खुजली का कारण बनती है. कुछ महिलाओं को पेट पर लाल या गुलाबी स्ट्रेच मार्क्स बनते हैं, और उनके आस-पास भी काफी खुजली हो सकती है. यह सब आम है और आमतौर पर डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे ठीक हो जाता है.
हालांकि, कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान एक विशेष प्रकार की खुजली का सामना करना पड़ता है जिसे इंट्राहेप्टिक कोलेस्टेसिस ऑफ प्रेगनेंसी (ICP) कहा जाता है. इसमें हाथों और पैरों में ज़्यादा और तेज़ खुजली होती है, खासकर रात में. इस प्रकार की खुजली त्वचा के कारण नहीं, बल्कि लिवर से संबंधित हार्मोनल बदलावों के कारण होती है। यह स्थिति कम ही होती है, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। यदि खुजली बहुत ज़्यादा हो, नींद खराब होने लगे या शरीर पर कोई दाने न हों और फिर भी बेचैनी महसूस हो, तो डॉक्टर से ज़रूर सलाह लेनी चाहिए.
उपाय
सामान्य खुजली को कम करने के कई आसान उपाय हैं. हल्के और मॉइस्चराइजिंग लोशन या नारियल तेल का नियमित प्रयोग त्वचा को कोमल बनाता है. अधिक गर्म पानी से न नहाएँ, क्योंकि यह त्वचा को और सूखा कर सकता है. ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि हवा आसानी से लगे और पसीना न जमे। ठंडे पानी की पट्टी भी काफी राहत देती है. पानी खूब पीना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि शरीर में नमी कम होने पर त्वचा अधिक सूख सकती है. यदि कोई क्रीम या घरेलू उपाय से लाभ न मिले और खुजली बढ़ती जाए, तो चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें.