इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख नजदीक आते ही यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति कभी ITR फाइल ही नहीं करे तो क्या होगा। कई लोगों को लगता है कि सिर्फ टैक्स देने वालों के लिए ही ITR जरूरी है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। अगर आपकी आय आयकर विभाग की तय सीमा से अधिक है या आप निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं, तो ITR दाखिल करना अनिवार्य हो सकता है। विदेश यात्रा, अधिक बिजली बिल, टीडीएस कटने और कुछ बड़े वित्तीय लेनदेन की स्थिति में भी रिटर्न दाखिल करना जरूरी हो सकता है।
जुर्माना और नोटिस
अगर तय समय सीमा के भीतर ITR दाखिल नहीं किया जाता है, तो आयकर विभाग की ओर से लेट फीस देनी पड़ सकती है। देरी की अवधि और आपकी आय के आधार पर जुर्माने की राशि अलग-अलग हो सकती है। यदि आप ITR भरने के पात्र हैं और लगातार रिटर्न दाखिल नहीं करते, तो आयकर विभाग नोटिस भी भेज सकता है। ऐसे में आपको अपनी आय और वित्तीय लेनदेन का पूरा विवरण देना पड़ सकता है।
अटक सकता है रिफंड
अगर आपकी सैलरी, बैंक ब्याज या अन्य आय पर टीडीएस (TDS) कट चुका है और आपने ITR दाखिल नहीं किया, तो आपको मिलने वाला टैक्स रिफंड अटक सकता है। यानी सरकार के पास जमा आपकी अतिरिक्त टैक्स राशि वापस पाने के लिए ITR दाखिल करना जरूरी होता है।
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लोन और वीजा पर असर
आजकल अधिकांश बैंक और वित्तीय संस्थान होम लोन, कार लोन या बिजनेस लोन देने से पहले पिछले दो से तीन वर्षों के ITR की कॉपी मांगते हैं। ITR नहीं होने पर लोन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा कई देशों के दूतावास वीजा आवेदन के दौरान भी पिछले कुछ वर्षों के ITR की मांग करते हैं, ताकि आवेदक की आय और वित्तीय स्थिति का आकलन किया जा सके।
बाद में भी मिल सकता है मौका
अगर तय समय सीमा निकल जाए, तब भी कुछ मामलों में आयकर विभाग के नियमों के तहत विलंबित ITR दाखिल किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए लेट फीस और अन्य निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। वहीं कारोबारी, फ्रीलांसर और प्रोफेशनल लोगों के लिए ITR एक महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज होता है। इसे नियमित रूप से दाखिल करने से भविष्य में टैक्स विवाद, वित्तीय लेनदेन और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में आने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है।