आईटीआर भरने के बाद कई लोगों को पता चलता है कि ब्याज की कमाई छूट गई, कोई छूट नहीं जोड़ी गई या गलत फॉर्म चुन लिया गया। ऐसी गलती होने पर घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर विभाग टैक्सपेयर्स को रिवाइज्ड रिटर्न भरकर पुरानी गलती ठीक करने का मौका देता है। यह सुविधा उन लोगों के लिए राहत है, जिनसे जल्दबाजी या जानकारी की कमी में गलत जानकारी भर गई हो। सही जानकारी देने से टैक्स का हिसाब ठीक होगा और अगर रिफंड बनता है तो उसका दावा भी किया जा सकेगा।
कौन कर सकता है सुधार
जिस व्यक्ति ने अपना आईटीआर पहले भर दिया है, वह गलती या कमी मिलने पर उसे सुधार सकता है। इसमें कमाई छूट जाना, डिडक्शन गलत भरना, बैंक ब्याज न जोड़ना, टैक्स का गलत हिसाब या गलत आईटीआर फॉर्म चुनना शामिल है। देर से भरा गया रिटर्न भी तय शर्तों के साथ सुधारा जा सकता है। लेकिन सुधार करते समय सभी जानकारी दोबारा ध्यान से जांचनी चाहिए। नया रिटर्न भरने के बाद वही अंतिम माना जाता है और पहले वाला रिटर्न उसकी जगह नहीं चलता।
रिवाइज्ड रिटर्न कैसे भरें
आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने पैन और पासवर्ड से लॉगिन करें। फिर ई-फाइल में इनकम टैक्स रिटर्न का विकल्प चुनें। जिस साल का रिटर्न सुधारा जाना है, उसे चुनें। फाइलिंग टाइप में रिवाइज्ड रिटर्न का विकल्प चुनना होगा। पुराने रिटर्न का रसीद नंबर और भरने की तारीख दर्ज करें। इसके बाद आय, बैंक ब्याज, टीडीएस, छूट और बैंक खाते की जानकारी सही करें। सारी जानकारी मिलाने के बाद रिटर्न जमा करें और ई-वेरिफाई जरूर करें।
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समय सीमा का रखें ध्यान
रिवाइज्ड रिटर्न भरने में समय सबसे जरूरी है। इसे संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने से पहले या आयकर विभाग की जांच पूरी होने से पहले भरना होता है, जो भी पहले हो। आयकर विभाग के अनुसार एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए देरी से भरा रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक भरा जा सकता है, अगर जांच पहले पूरी न हो। इसलिए गलती दिखते ही इंतजार न करें। समय निकलने के बाद आपके पास सीमित रास्ते बचते हैं और अपडेटेड रिटर्न में अतिरिक्त टैक्स लग सकता है।
रिफंड आने के बाद भी सुधार
अगर आपका रिफंड बैंक खाते में आ चुका है, तब भी तय समय के भीतर रिवाइज्ड रिटर्न भरा जा सकता है। नई जानकारी के बाद विभाग टैक्स और रिफंड का हिसाब फिर से करेगा। अगर ज्यादा रिफंड मिला था तो रकम वापस करनी पड़ सकती है। अगर कम रिफंड मिला था तो बाकी रकम मिल सकती है। इसलिए बैंक खाता पहले से सत्यापित रखें। आयकर विभाग के मुताबिक रिफंड के लिए सही बैंक खाता और रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन जरूरी है।
जल्दबाजी से बचें, जांच जरूर करें
रिटर्न भरने से पहले फॉर्म 16, बैंक ब्याज, टीडीएस, निवेश के कागज और एआईएस की जानकारी मिला लें। बार-बार रिवाइज्ड रिटर्न भरने की कानूनी रोक नहीं है, लेकिन एक बार में पूरी गलती सुधारना बेहतर रहता है। गलत या अधूरी जानकारी देने से बाद में नोटिस आ सकता है। टैक्स का मामला समझ न आए तो चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद लें। सही रिटर्न भरना केवल रिफंड पाने के लिए नहीं, बल्कि आगे की परेशानी से बचने के लिए भी जरूरी है।