मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में चूहों का आतंक बढ़ता जा रहा है। हाल ही में मानसिक रोग विभाग में भर्ती 25 वर्षीय महिला मरीज की एड़ी चूहों ने कुतर दी। यह घटना रात के समय हुई, जिससे परिजनों में भारी आक्रोश और हड़कंप मच गया। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रशासन का दावा है कि पेस्ट कंट्रोल कराया जा रहा है, लेकिन हालात अभी भी भयावह बने हुए हैं।
क्या है मामला ?
जबलपुर के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल का मानसिक रोग विभाग इन दिनों चूहों के आतंक के लिए चर्चा में है। सिहोरा निवासी 25 वर्षीय महिला, नरसिंहपुर निवासी 50 वर्षीय महिला व उनका 26 वर्षीय बेटा अस्पताल में इलाज के दौरान चूहों के हमले का शिकार बने। परिजनों ने बताया कि रात के लगभग 3 बजे चूहों ने उनकी मां की एड़ी कुतर दी, जिससे लाल निशान बन गए। जगदीश मेहरा ने बताया कि डॉक्टरों ने तुरंत तीन इंजेक्शन लगाए। परिजनों का कहना है कि ऐसी घटना अकेले उनकी मां के साथ ही नहीं हुई, बल्कि अन्य मरीज भी चूहों के हमलों से परेशान हैं।
परिवार का आरोप है कि इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। उनका कहना है कि यदि इंदौर के एमवाय हॉस्पिटल की घटना के बाद उचित कदम उठाए गए होते, तो इस प्रकार की दुर्व्यवस्था नहीं होती।
मरीजों के लिए बना खतरा
चूहों का आतंक इतना बढ़ गया है कि मरीजों को वार्ड में भर्ती रहकर उपचार कराने में कठिनाई हो रही है। रातभर चूहों की आवाजें सुनाई देती हैं, जिससे सोना मुश्किल हो गया है। कुछ परिजन तो यह भी कह रहे हैं कि चूहों के चलते उन्होंने मानसिक रूप से भी असहजता महसूस की। वार्ड में साफ-सफाई और सुरक्षा के नाम पर की जा रही हर महीने लाखों रुपए की खर्चीली व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
यह घटना तब और गंभीर हो जाती है, जब अस्पताल की संरचना की बात की जाए। 70 साल पुरानी बिल्डिंग में दरारें और गंदगी का अम्बार है। सीवरेज सिस्टम भी ठीक से कार्य नहीं कर रहा। इन परिस्थितियों के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाने से मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी है।
प्रबंधन का बयान: पेस्ट कंट्रोल करवा रहे हैं
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने पूरे मामले पर बयान दिया है। उनका कहना है कि चिकित्सक और स्टाफ लगातार निगरानी में लगे हुए हैं। मानसिक रोग विभाग की घटना से सबक लेते हुए दोबारा ऐसी घटना न हो, इसके लिए सख्त हिदायतें जारी की गई हैं। अस्पताल में पेस्ट कंट्रोल की कार्रवाई भी करवाई जा रही है।
डॉ. सक्सेना ने बताया कि मरीजों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। वे इसे गंभीरता से ले रहे हैं और समस्या का जल्द समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं। बावजूद इसके, चूहों का आतंक अभी भी जारी है।
पुरानी बिल्डिंग और अव्यवस्था: समस्या की जड़
जबलपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की बिल्डिंग लगभग 70 साल पुरानी है। जगह-जगह दरारें आ चुकी हैं और सीवरेज सिस्टम भी बेहतर नहीं है। गंदगी की भरमार के चलते चूहों के रहने की उपयुक्त परिस्थितियां बनी हुई हैं।
अस्पताल में सुरक्षा पर हर महीने लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। 250 से अधिक निजी गार्ड तैनात हैं, जिनका कार्य मरीजों के स्वजन द्वारा खानपान सामग्री वार्ड तक ले जाने को रोकना है। लेकिन यह भी असफल साबित हो रहा है। यह स्पष्ट करता है कि व्यवस्थापकों की दावों में कितनी सच्चाई बची है।
मरीजों के परिजन और आम जनता अब प्रशासन से तत्काल प्रभाव से कठोर कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि केवल पेस्ट कंट्रोल से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि संपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार व व्यवस्थागत सुधार किए जाने चाहिए।