जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने या उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की है। उनका कहना है कि ये नियम छात्रों के बीच अविश्वास और वैमनस्य पैदा करेंगे और शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाएंगे। परमहंस आचार्य का आरोप है कि ये नियम सवर्ण छात्रों को दोषी ठहराने की मानसिकता को बढ़ावा देते हैं और उन्हें पहले से ही दोषी मानते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इन नियमों को वापस नहीं लेती है, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जानी चाहिए।
यूजीसी के नए नियमों में कई बदलाव
उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और समावेशन को बढ़ावा देने के लिए एक नीति बनाना अनिवार्य होगा। इसके साथ जातिगत भेदभाव के खिलाफ सख्त नियम बनाए गए हैं, जिसमें OBC को भी शामिल किया गया है। हर संस्थान में एक इक्विटी सेल बनाना अनिवार्य होगा, जो भेदभाव के मामलों की जांच कर सकेगा। शिक्षकों के लिए एक आचरण संहिता लागू की गई है। प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी और योग्यता-आधारित होगी। इसके साथ संस्थानों को यूजीसी को अनिवार्य रूप से डेटा रिपोर्ट करना होगा। संस्थानों में शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।
नए नियमों से ये बदलाव होंगे
उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और समावेशन को बढ़ावा देने के लिए एक नीति बनाना अनिवार्य होगा। जातिगत भेदभाव के खिलाफ सख्त नियम बनाए गए हैं, जिसमें OBC को भी शामिल किया गया है। एक इक्विटी सेल बनाना अनिवार्य होगा, जो भेदभाव के मामलों की जांच करेगा। शिक्षकों के लिए एक आचरण संहिता लागू की गई है। प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी और योग्यता-आधारित होगी। संस्थानों को यूजीसी को अनिवार्य रूप से डेटा रिपोर्ट करना होगा। संस्थानों में शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।