भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की तिथियों को लेकर पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और इस्कॉन के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गया है। विवाद का केंद्र विदेशों में अलग-अलग तारीखों पर निकाली जा रही रथयात्राएं हैं। पुरी की परंपरा का हवाला देते हुए गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने इसे शास्त्रों के विपरीत बताया है और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। दूसरी ओर इस्कॉन का कहना है कि अलग-अलग देशों की परिस्थितियां एक समान तिथि पर आयोजन की अनुमति नहीं देतीं।
परंपरा बनाम वैश्विक आयोजन पर मतभेद
पुरी की जगन्नाथ मंदिर समिति का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सदियों से आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन ही प्रारंभ होती रही है और इसका उल्लेख स्कंद पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। समिति के अध्यक्ष और पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब का कहना है कि इस परंपरा में बदलाव धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं है। उनका आरोप है कि विदेशों में अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा निकालकर स्थापित परंपरा से विचलन किया जा रहा है।
वर्षों की बातचीत के बाद भी नहीं निकला समाधान
मंदिर समिति के अनुसार इस विषय पर इस्कॉन के साथ करीब दो दशक से चर्चा चल रही है। वर्ष 2021 में भारत के भीतर आयोजित होने वाली रथयात्राओं की तिथि को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन विदेशों में उसी व्यवस्था को लागू नहीं किया गया। समिति का कहना है कि इस विषय पर कई स्तरों पर संवाद हुआ, बावजूद इसके कोई सर्वमान्य समाधान नहीं निकल सका।
इस्कॉन ने बताई व्यावहारिक चुनौतियां
इस्कॉन का पक्ष है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में मौसम, स्थानीय कानून और प्रशासनिक व्यवस्थाएं भिन्न होती हैं। ऐसे में हर स्थान पर एक ही दिन रथयात्रा आयोजित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। संगठन का कहना है कि भारत में अधिकांश रथयात्राएं पुरी मंदिर प्रशासन से समन्वय के बाद तय तिथियों पर होती हैं, जबकि विदेशों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्यक्रम निर्धारित किए जाते हैं।
बेंगलुरु इकाई का अलग फैसला, बढ़ी चर्चा
विवाद के बीच इस्कॉन की बेंगलुरु इकाई ने स्पष्ट किया है कि वह पुरी मंदिर द्वारा निर्धारित नौ दिवसीय रथयात्रा अवधि के भीतर ही अपने सभी आयोजनों का संचालन करेगी। वहीं मायापुर मुख्यालय से जुड़े संगठन ने अपने पूर्व रुख में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। इससे इस्कॉन के भीतर भी अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आने की चर्चा तेज हो गई है।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका आग्रह है कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन शास्त्रसम्मत परंपरा के अनुरूप ही हो और विदेशों में अलग-अलग तिथियों पर होने वाले आयोजनों पर पुनर्विचार कराया जाए। इस बीच श्रद्धालुओं की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद से कोई साझा रास्ता निकलता है या नहीं।