वृंदावन की पावन भूमि पर एक विशेष आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, जब नेपाल से आए जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीराम कृष्णाचार्य ने प्रेमानंद महाराज से भेंट की। इस दौरान उन्होंने नेपाल के समस्त सनातनी हिंदुओं की ओर से प्रेमानंद महाराज को सादर प्रणाम किया और उनके दीर्घायु होने की कामना की। इस मुलाकात को संत समाज में विशेष महत्व के रूप में देखा जा रहा है।
कौन हैं स्वामी श्रीराम कृष्णाचार्य
स्वामी श्रीराम कृष्णाचार्य रामानंद संप्रदाय के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं। वे नेपाल के वाराहक्षेत्र चतराधाम सुनसरी स्थित श्री रामतारक ब्रह्मपीठ के पीठाधीश्वर हैं। उन्हें महायोगी सिद्ध बाबा के नाम से भी जाना जाता है। नेपाल में सनातन धर्म के संरक्षण और प्रचार में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नेपाल में हनुमद महायज्ञ और साधना
स्वामी श्रीराम कृष्णाचार्य ने नेपाल में विशाल हनुमद महायज्ञ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों का नेतृत्व किया है। इन आयोजनों में एक अरब मंत्र जप और करोड़ों आहुतियों का संकल्प लिया गया। उन्होंने श्रुति शब्द योग और नाम जप साधना के माध्यम से लाखों शिष्यों को सनातन मार्ग से जोड़ा है और धार्मिक चेतना को मजबूत किया है।
माया से मोड़कर भगवान की ओर
स्वामी जी ने कहा कि संतों का सबसे बड़ा कार्य मनुष्य को माया से हटाकर भगवान की ओर लगाना है। यदि एक भी व्यक्ति का चित्त भगवान के सन्मुख हो जाए, तो वह किसी भी बड़े यज्ञ से बढ़कर होता है। उन्होंने नाम जप की महिमा बताते हुए कहा कि नाम ही प्रेम का मूल है और बिना नाम के साधना अधूरी रहती है।
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डिप्रेशन और मानसिक कष्ट का समाधान
सत्संग के दौरान आधुनिक जीवन की बड़ी समस्या मानसिक तनाव और डिप्रेशन पर भी चर्चा हुई। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि संतों की वाणी का अनुसरण करने से भय चिंता और शोक से मुक्ति मिलती है। भगवान के नाम में इतनी शक्ति है कि वह जीवन के गहरे दुखों को भी समाप्त कर देता है। कई लोग जो पहले दवाइयों पर निर्भर थे वे केवल नाम जप से स्वस्थ हुए हैं।
संत और भगवान एक ही तत्व
स्वामी श्रीराम कृष्णाचार्य के शिष्यों ने उनके योग बल का उल्लेख करते हुए बताया कि वे बिना भोजन और ऑक्सीजन के 9 दिनों तक समाधि में रह सकते हैं। इस पर संतों ने निष्कर्ष दिया कि संत और भगवान अलग नहीं हैं। भगवान ही संत रूप में धरती पर आकर मानव कल्याण का कार्य करते हैं। यह संदेश इस भेंट का सबसे बड़ा सार रहा।