Jagdeep Dhankhar: देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे उसी रात स्वीकार भी कर लिया गया. इस्तीफे से कुछ देर पहले उन्होंने राष्ट्रपति भवन का "अनिर्धारित दौरा" किया और रात 9 बजे राष्ट्रपति से मुलाकात की. इसके आधे घंटे बाद उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिए इस्तीफा सार्वजनिक कर दिया। 74 वर्षीय धनखड़ का कार्यकाल अगस्त 2027 तक था, लेकिन उन्होंने ढाई साल पहले ही पद से हटने का निर्णय लिया.
स्वास्थ्य बहाना या अंदरुनी विवाद?
धनखड़ ने अपने पत्र में लिखा कि वह स्वास्थ्य कारणों से यह निर्णय ले रहे हैं, लेकिन कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का मानना है कि असली वजह कुछ और ही है. सूत्रों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति ने हाल ही में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग का नोटिस राज्यसभा में लाने की सिफारिश की थी, जबकि सरकार चाहती थी कि यह मामला सिर्फ लोकसभा में उठे. यह मतभेद केंद्र और उपराष्ट्रपति के बीच टकराव का कारण बन गया. सोमवार को विपक्ष के 63 सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए, लेकिन एनडीए का कोई सांसद इसमें शामिल नहीं हुआ.
सरकार की ठंडी प्रतिक्रिया ने खड़े किए सवाल
धनखड़ के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया भी काफी देर से आई, जिससे राजनीतिक गलियारों में और ज्यादा चर्चाएं शुरू हो गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान इस्तीफे के करीब 15 घंटे बाद आया, वहीं राजपत्र में राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफा स्वीकार करने की सूचना दोपहर 1.11 बजे प्रकाशित हुई। आमतौर पर इतने बड़े पद से इस्तीफे के बाद सरकार की तरफ से प्रशंसा जताई जाती है, लेकिन इस बार सत्तारूढ़ पक्ष की चुप्पी ने यह संकेत दे दिया कि शायद सरकार धनखड़ के फैसले से नाखुश नहीं थी.