
Jagdeep dhankhar resignation : नई दिल्ली । भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के पीछे की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा सौंपा, लेकिन अंदरखाने की कहानी कुछ और ही इशारा करती है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, अप्रैल 2025 में संसद टीवी में एक विवादित नियुक्ति की कोशिश ने सत्ता और संवैधानिक मर्यादाओं के बीच ऐसा टकराव पैदा किया, जिसने अंततः उपराष्ट्रपति की कुर्सी हिला दी। इस नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और धनखड़ के बीच जबरदस्त तनाव उत्पन्न हुआ।
कैसे नियुक्ति बनी विवाद की जड़?
धनखड़ ने अप्रैल में संसद टीवी के प्रभारी सचिव के तौर पर एक जूनियर अधिकारी को नियुक्त करने की कोशिश की थी। यह अधिकार केवल कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) को है। जब पीएम विदेश दौरे पर थे, तब यह आदेश जारी होने वाला था, जिसे रोकने के लिए PMO, कैडर कंट्रोल अथॉरिटी और राज्यसभा सचिवालय को एक साथ सक्रिय होना पड़ा। अधिकारी को भी ज्वाइन करने से रोक दिया गया और कानूनी संकट की चेतावनी दी गई। सूत्रों ने इसे “तख्तापलट जैसी स्थिति” करार दिया।
घर की शिफ्टिंग पर भी हुआ टकराव
सूत्रों के अनुसार, धनखड़ का एक और विवाद तब सामने आया जब उन्होंने अपने आधिकारिक निवास को लेकर शिकायत की। इस वजह से तत्कालीन शहरी विकास सचिव को हटाया गया था। इससे यह साफ हुआ कि उनका कार्यशैली को लेकर सरकार से मतभेद लंबे समय से जारी थे।
अब क्या आगे?
धनखड़ अगस्त 2022 में 14वें उपराष्ट्रपति बने थे और उनका कार्यकाल अगस्त 2027 तक था। इस्तीफे के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पीसी मोदी को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि भाजपा और विपक्ष इस पद के लिए किसे मैदान में उतारते हैं।