भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. 74 साल के धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया. उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में लिखा, "स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए और डॉक्टरों की सलाह पर मैं उपराष्ट्रपति पद से तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूं." उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया.
"2027 में रिटायर होना चाहता हूं"
धनखड़ ने 10 जुलाई को दिल्ली स्थित जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. वहां उन्होंने कहा था, "अगर भगवान की कृपा रही तो मैं अगस्त 2027 में तय समय पर रिटायर हो जाऊंगा." लेकिन इसके 11 दिन बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
जयपुर दौरा भी तय था
धनखड़ का 23 जुलाई को जयपुर दौरा भी तय था. उन्हें वहां रामबाग पैलेस में CREDAI (रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) राजस्थान की नई समिति के साथ एक संवाद कार्यक्रम में शामिल होना था.
2022 में बने थे उपराष्ट्रपति
जगदीप धनखड़ ने 6 अगस्त 2022 को देश के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी. उन्होंने इस चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था. उन्हें 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को सिर्फ 182 वोट मिले थे.
कार्यकाल पूरा न करने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति
धनखड़ भारत के ऐसे तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया. इससे पहले कृष्ण कांत (1997-2002) का कार्यकाल उनके निधन के कारण अधूरा रहा. वहीं वी.वी. गिरी ने 1969 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था.
पहले भी स्वास्थ्य बिगड़ चुका है
धनखड़ की तबीयत 25 जून 2025 को उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान अचानक खराब हो गई थी. वो नैनीताल में एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जहां कार्यक्रम के बाद उन्हें सीने में दर्द हुआ. उन्हें तुरंत राजभवन में प्राथमिक इलाज दिया गया. इससे पहले 9 मार्च 2025 को भी सीने में दर्द की वजह से उन्हें एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया था और 12 मार्च को डिस्चार्ज किया गया था.
अब राज्यसभा की जिम्मेदारी किसके पास?
भारत के उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं. धनखड़ के इस्तीफे के बाद जब तक नया उपराष्ट्रपति नहीं चुना जाता, तब तक राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह यह जिम्मेदारी संभालेंगे. संविधान के अनुच्छेद 91 के तहत यह प्रावधान है.