Jaish-e-Mohammed: सहारनपुर और फरीदाबाद से गिरफ्तार दो डॉक्टरों के जैश-ए-मोहम्मद से संबंधों का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, डॉक्टर आदिल अहमद और मुजम्मिल आतंकी संगठन के लिए काम कर रहे थे और उनसे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर संपर्क में रहते थे। एजेंसियों को शक है कि इस फिदायीन मॉड्यूल के पीछे आतंकी मसूद अजहर का भाई मौलाना अम्मार अल्वी उर्फ मोहिउद्दीन आलमगीर का हाथ है। माना जा रहा है कि अम्मार ही इस मॉड्यूल का मास्टरमाइंड था, जो भारत में आतंकी साजिशों को अंजाम देने की योजना बना रहा था।
पाकिस्तान से मिल रहे थे निर्देश
पूछताछ में दोनों डॉक्टरों ने कबूला है कि वे पाकिस्तान के एक जैश हैंडलर के संपर्क में थे, जो उन्हें एन्क्रिप्टेड माध्यम से आदेश देता था। बताया जा रहा है कि इन्हें विस्फोटक सामग्री इकट्ठा करने के निर्देश दिए गए थे, हालांकि उन्होंने किसी खास टारगेट की जानकारी से इनकार किया है। एजेंसियां उन 30 पाकिस्तानी नंबरों की जांच कर रही हैं जो डॉक्टरों के फोन से मिले हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि जैश अब भारतीय नागरिकों को अपने नेटवर्क में शामिल कर आतंकी हमलों को “घरेलू आंदोलन” के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा है।
अम्मार अल्वी पर कई हमलों का आरोप
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, मौलाना अम्मार अल्वी 2016 से जैश के फिदायीन मॉड्यूल का प्रमुख है और वह भारत में घुसपैठ कर आतंकी ट्रेनिंग देता था। 2019 के पुलवामा हमले में भी उसका नाम सामने आया था। 2022 में भारत सरकार ने उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था। हाल के दिनों में मसूद अजहर लगातार कश्मीर में जिहाद को भड़काने वाले संदेश जारी कर रहा है। एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के और सदस्यों की पहचान कर रही हैं ताकि पाकिस्तान की नई आतंकी साजिश को पूरी तरह नाकाम किया जा सके।