बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक शोक कार्यक्रम के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक के बीच हुई संक्षिप्त मुलाकात ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। महज औपचारिक हाथ मिलाने को पाकिस्तान ने बड़ी राजनीतिक पहल बताने की कोशिश की, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया कि इसे बढ़ा-चढ़ाकर देखना गलत है।
शोक कार्यक्रम में जुटे विदेशी प्रतिनिधि
पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद ढाका में आयोजित अंतिम संस्कार में कई देशों के वरिष्ठ नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए। इसी कार्यक्रम में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर मौजूद थे, जबकि पाकिस्तान की तरफ से नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक ने शिरकत की। अंतरराष्ट्रीय मंच होने के कारण कई नेताओं के बीच औपचारिक अभिवादन स्वाभाविक था।
कुछ पलों की शिष्टाचार भेंट
कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं की मौजूदगी एक ही स्थान पर हुई। इसी क्रम में शिष्टाचार के तहत हाथ मिलाया गया। यह मुलाकात न तो पूर्व निर्धारित थी और न ही इसमें किसी तरह की बातचीत या एजेंडा शामिल था। दोनों नेताओं के बीच कोई द्विपक्षीय चर्चा नहीं हुई और न ही किसी बैठक का संकेत दिया गया।
पाकिस्तान का दावा और सियासी प्रचार
इस सामान्य शिष्टाचार को पाकिस्तान ने राजनीतिक रंग देने की कोशिश की। वहां इसे भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय बाद हुई ‘महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय मुलाकात’ के रूप में पेश किया गया। पाकिस्तान की ओर से यह संदेश देने का प्रयास हुआ कि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाएं फिर से बन रही हैं।
भारत की दो टूक प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के दावों पर भारत ने तुरंत स्थिति साफ की। भारतीय पक्ष ने कहा कि यह सिर्फ शोक के अवसर पर हुई एक औपचारिक मुलाकात थी, जिसे किसी भी तरह की कूटनीतिक पहल या संवाद की शुरुआत नहीं माना जा सकता। भारत ने साफ कर दिया कि इस घटना को जरूरत से ज्यादा तूल देना तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है।
दोहरे रवैये पर उठे सवाल
भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति और संवाद की बातें करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। शोक जैसे संवेदनशील अवसर पर हुई मर्यादित मुलाकात को राजनीतिक उपलब्धि बताना उचित नहीं है। भारत ने दोहराया कि रिश्तों में सुधार के लिए माहौल और व्यवहार दोनों का ईमानदार होना जरूरी है।