Jaishankars Big Statement: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बदलती वैश्विक राजनीति को लेकर अहम बात कही है। म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अमेरिका के रुख में बदलाव और चीन का बढ़ता प्रभाव दो बड़े बदलाव हैं। जयशंकर के मुताबिक, अमेरिका ने अपनी रणनीति में ऐसा बदलाव किया है, जिससे वह पहले की तुलना में ज्यादा अकेली शक्ति के रूप में सामने आया है, जबकि चीन लगातार अपनी आर्थिक और राजनीतिक ताकत बढ़ा रहा है।
अमेरिका के रुख में बड़ा बदलाव, चीन का प्रभाव बढ़ा
जयशंकर ने कहा कि दुनिया में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। चीन खुद को एक अलग तरह की शक्ति मानता है और कई मामलों में उसका बढ़ता प्रभाव इसे दिखाता भी है। उन्होंने कहा कि यह मुकाबला अब केवल अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर दूसरे देशों की नीतियों और उनके फैसलों पर भी पड़ रहा है।
देशों की ताकत का इस्तेमाल अब रणनीतिक हथियार की तरह
विदेश मंत्री ने कहा कि मौजूदा प्रतिस्पर्धा के दौर में देशों के पास मौजूद आर्थिक, व्यापारिक और दूसरे प्रभावों का इस्तेमाल रणनीतिक दबाव के तौर पर किया जा रहा है। उनका कहना था कि दुनिया एक-दूसरे पर निर्भर भी है और इसी के साथ देशों के बीच प्रतिस्पर्धा भी चल रही है। ऐसे में सप्लाई चेन, बाजार और उत्पादन क्षमता जैसी चीजें अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उभरती ताकतों को अपने हितों का संतुलन बनाना होगा
जयशंकर ने कहा कि उभरते और मध्यम शक्ति वाले देश किसी एक खेमे तक सीमित रहने के बजाय अपने हितों के आधार पर अलग-अलग देशों के साथ सहयोग बढ़ा सकते हैं। उन्होंने क्वाड जैसे सहयोग के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां हितों में सीधा टकराव नहीं है, वहां देश मिलकर काम करने के नए रास्ते तलाश रहे हैं।
Goldilocks Scenario क्या है?
जयशंकर ने अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में 'Goldilocks Scenario' की बात भी कही। इसका मतलब ऐसी स्थिति से है जिसमें तनाव इतना ज्यादा न हो कि वैश्विक व्यवस्था अस्थिर हो जाए और संबंध इतने सामान्य भी न हों कि प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म हो जाए। यानी दोनों के बीच एक ऐसा संतुलन बना रहे, जिसमें दूसरे देशों के पास अपने हितों के मुताबिक फैसले लेने और सहयोग बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश बनी रहे।