मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल तब आया, जब प्रदेश सरकार के ही एक मंत्री पर 1,000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगा। जल जीवन मिशन के तहत हुए कार्यों में यह भारी घोटाला सामने आया है। आरोप है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उईके ने परियोजनाओं में रिश्वत के तौर पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की। शिकायत मिलने के बाद खुद मोहन सरकार ने मंत्री के खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है। विभागीय स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है और सभी संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। यह मामला केवल एक मंत्री तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि सिस्टम में कई स्तरों पर भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। यदि आरोप सही साबित हुए तो यह देश के सबसे बड़े जल घोटालों में से एक हो सकता है।
मंत्री पर लगे घोटाले के गंभीर आरोप
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की मंत्री संपतिया उईके पर आरोप है कि उन्होंने जल जीवन मिशन की परियोजनाओं में बड़े स्तर पर रिश्वत ली। पूर्व विधायक द्वारा की गई शिकायत में यह दावा किया गया है कि मंत्री ने 1,000 करोड़ रुपये का कमीशन लिया। यह आरोप केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश को दिए गए 30,000 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर लगाया गया है।
पीएमओ ने मांगी रिपोर्ट, विभागीय जांच शुरू
शिकायत के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने राज्य सरकार से मामले की रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। PHE विभाग के प्रमुख अभियंता ने सभी परियोजना निदेशकों और अभियंताओं को 7 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
संपत्ति जांच और घोटाले की आशंका
सिर्फ मंत्री ही नहीं, विभाग के अन्य अधिकारियों की संपत्ति और कार्यों की भी जांच की जा रही है। शिकायतकर्ता का दावा है कि हजारों फर्जी प्रमाण पत्र केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। यदि निष्पक्ष जांच हो, तो यह देश का सबसे बड़ा जल घोटाला साबित हो सकता है।