Kerala Elections: केरल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले नया समीकरण सामने आया है। जमात-ए-इस्लामी हिंद केरल ने साफ कर दिया है कि उसका मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से दूर रखना है। संगठन ने ऐलान किया है कि वह उस किसी भी उम्मीदवार का समर्थन करेगा जो बीजेपी को हराने की स्थिति में हो, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो। इस घोषणा ने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
समर्थन का ऐलान
जमात-ए-इस्लामी हिंद केरल के नेता मुजीब रहमान ने कहा कि संगठन का एजेंडा पूरी तरह स्पष्ट है। उनका कहना है कि बीजेपी को केरल में सत्ता में आने से रोकना उनकी प्राथमिकता है। इसी नीति के तहत विधानसभा चुनावों में बीजेपी के खिलाफ मजबूत उम्मीदवारों का समर्थन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय निकाय चुनावों में भी संगठन ने इसी रणनीति पर काम किया था।
वाम और यूडीएफ से मतभेद, फिर भी समर्थन
मुजीब रहमान ने स्वीकार किया कि जमात के वामपंथी दलों से कई वैचारिक मतभेद हैं। इसके बावजूद बीजेपी को रोकने के लिए वाम लोकतांत्रिक मोर्चा और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा के उम्मीदवारों को समर्थन दिया जा सकता है। संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे बीजेपी के खिलाफ जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करें।
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वाम सरकार पर सवाल, ध्रुवीकरण का आरोप
रहमान ने केरल की मौजूदा वामपंथी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तीसरी बार सत्ता में बने रहने के लिए ध्रुवीकरण की राजनीति करना खतरनाक है। उनके मुताबिक, वोटों के ध्रुवीकरण से केरल के सामाजिक और धर्मनिरपेक्ष ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।
तीखे बयान, राजनीतिक चेतावनी
सीपीआई(एम) नेता एके बालन की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए रहमान ने कहा कि डर और अफवाह फैलाने की राजनीति से बचा जाना चाहिए। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि स्थानीय निकाय चुनावों से सबक लेते हुए बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए आपसी सहयोग का रास्ता अपनाया जाए।