Jamia Student Union Election Protest : दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है। विश्वविद्यालय की दीवारों पर कथित आपत्तिजनक नारे लिखे जाने के बाद मामला गरमा गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना की निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही है। वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि इस विवाद के जरिए छात्र संघ चुनाव की मांग से ध्यान हटाने की कोशिश हो रही है। भाजपा, कांग्रेस, एबीवीपी और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने भी इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
छात्रों की तीन बड़ी मांगें
जामिया में यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑफ जामिया के बैनर तले छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। छात्रों की पहली मांग है कि चुनाव की तारीख जल्द घोषित की जाए। दूसरी मांग प्रदर्शनकारी छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की है। तीसरी मांग सिक्योरिटी एडवाइजर और चीफ प्रॉक्टर को उनके पदों से हटाने की है। छात्रों का कहना है कि छात्र संघ उनकी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने का लोकतांत्रिक मंच है। उनका आरोप है कि लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को अपनी बात सामूहिक रूप से रखने में परेशानी होती है।
प्रशासन ने बनाई ड्राफ्ट कमेटी
छात्रों की मांगों पर विश्वविद्यालय की हाईलेवल कमेटी ने बताया है कि छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए ड्राफ्ट कमेटी गठित की गई है। प्रशासन का कहना है कि जरूरी नियम और संविधान तय किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। कमेटी ने 12 अक्टूबर के बाद की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा करने की बात भी कही है। हालांकि, छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए दो महीने का समय बताया है, लेकिन चुनाव कराने की निश्चित तारीख नहीं दी। इसी वजह से आंदोलन जारी है।
13 दिनों से भूख हड़ताल पर छात्र
प्रदर्शनकारी छात्र जासिम अली खान के मुताबिक, वह 13 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने दो महीने में संविधान का मसौदा तैयार करने की बात कही है, लेकिन चुनाव की तारीख पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। छात्रों का कहना है कि संविधान तैयार करने में उनकी मदद भी ली जा सकती है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय से हस्तक्षेप करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि जब उनकी मांग लंबे समय से लंबित है, तो प्रशासन को चुनाव की प्रक्रिया और समयसीमा स्पष्ट करनी चाहिए।
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भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बयान
विवादित नारों के मामले में एबीवीपी ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी घटना पर सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए शाहीन बाग आंदोलन का जिक्र किया। दूसरी तरफ, एआईएमआईएम की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष डॉ. शोएब जमई ने आरोप लगाया कि छात्र संघ चुनाव के आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद छात्रों से मिलने जामिया पहुंचे। बाद में दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। मसूद ने कहा कि उन्होंने कश्मीर को भारत से अलग करने वाले किसी भी नारे का समर्थन नहीं किया और कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया।
2005 के बाद नहीं हुए चुनाव
जामिया में छात्र संघ चुनाव का विवाद कई साल पुराना है। विश्वविद्यालय में आखिरी बार 2005 में चुनाव हुए थे। इसके बाद 31 मार्च 2006 को प्रशासन ने परिसर में हिंसा, गड़बड़ी और पढ़ाई प्रभावित होने का हवाला देते हुए चुनी हुई छात्र संघ इकाई को भंग कर दिया था। वर्ष 2012 में चुनाव कराने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी, लेकिन चुनाव नहीं हो सके। अब छात्र फिर से चुनाव की मांग उठा रहे हैं। विवादित नारों की घटना ने इस आंदोलन को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।