जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की मांग को लेकर पिछले 14-15 दिनों से चल रहा छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सभी गेट बंद करने के आदेश के बाद छात्र आक्रोशित हैं। छात्रों का कहना है कि प्रशासन डरा हुआ है और आंदोलन को हिंसक तरीके से दबाने की कोशिश कर रहा है, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को हटाया जा रहा है।
7-7 लोग एक कमरे में रहते हैं
छात्रों ने तीन मांगें रखी हैं, छात्र संघ बहाल किया जाए, प्रदर्शनकारियों पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और प्रॉक्टर इस्तीफा दें। वहीं, छात्रों का कहना है कि इब्न सीना लाइब्रेरी रात 2 बजे तक खुलती है, कई छात्र 7-7 लोग एक कमरे में रहते हैं, ऐसे में गेट बंद होने से उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होगी।
14-15 दिनों से प्रदर्शन
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने कहा, "हमारी रणनीति शुरू से ही स्पष्ट रही है। हम पिछले 14-15 दिनों से यहां प्रदर्शन कर रहे हैं और छात्र भूख हड़ताल पर हैं। हमारी सिर्फ एक ही मांग है, हम छात्र संघ चाहते हैं। हम इसी मांग को लेकर अपना प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं और हमारी रणनीति स्पष्ट है कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं और हमें छात्र संघ नहीं मिल जाता, हम यहां से नहीं जाएंगे।"
कैंपस के अंदर हिंसक माहौल
एक छात्र ने कहा कि वे हमारे पूरे प्रदर्शन स्थल को हटाने और हमें यहां से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। वे कैंपस के अंदर हिंसक माहौल बना रहे हैं, लेकिन हम डटे हुए हैं। हम अपनी मांगें पूरी करने के लिए कह रहे हैं। बस हमें यूनियन दे दीजिए। देखिए कैसे वे अभी छात्रों को घसीट रहे हैं।
सभी प्रतिबंधों को हटाया
एक अन्य छात्र ने कहा कि हमारी तीन मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं। पहली मांग छात्र संघ की है, दूसरी मांग है कि प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाया जाए, तीसरी मांग प्रॉक्टर के इस्तीफे की है। इससे अधिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं हो सकता, ये तो भूख हड़ताल पर बैठे थे। बहुत ही हिंसक तरीके से इसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है।