Kashmiri Pandit Threat---जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को कथित तौर पर फिर धमकाए जाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर सामने आई एक सूची में सरकारी कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर, कार्यस्थल और घरों के पते जैसी निजी जानकारियां होने का दावा किया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। घाटी के साथ जम्मू में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी निगरानी बढ़ाई गई है।
सोशल मीडिया पर सामने आई कथित सूची
कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को लेकर कथित तौर पर एक धमकी भरी सूची सामने आई है। इसमें कर्मचारियों के नाम के साथ उनके मोबाइल नंबर, कार्यस्थल और घर के पते जैसी जानकारियां शामिल होने की बात कही जा रही है। कुछ मामलों में घर के मकान और गली नंबर तक की जानकारी होने का दावा है। संवेदनशील जानकारियों के सार्वजनिक होने से कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच चिंता बढ़ गई है।
ULC पर लगाए जा रहे हैं धमकी जारी करने के आरोप
सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस कथित सूची को यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी ULC से जोड़कर देखा जा रहा है। इसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा संगठन बताया जा रहा है। हालांकि, सूची और धमकी की जिम्मेदारी से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। कथित धमकी संदेशों में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। इनमें प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे कर्मचारियों की जानकारी भी शामिल होने का दावा किया गया है।
जम्मू में रहने वाले परिवारों का भी जिक्र
इस बार सामने आई कथित जानकारी को लेकर सबसे ज्यादा चिंता इसलिए है क्योंकि इसमें केवल घाटी में रहने वाले लोगों तक ही मामला सीमित होने की बात नहीं कही जा रही है। जम्मू में रहने वाले कश्मीरी पंडित परिवारों के घरों की जानकारी भी सूची में शामिल होने का दावा किया गया है। धमकी भरे संदेशों में घाटी वापस लौटे कश्मीरी पंडितों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। इससे समुदाय के पुनर्वास की प्रक्रिया को लेकर नई चिंता पैदा हुई है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी मिलने का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। इससे पहले भी इस तरह की धमकियों के बाद प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी पड़ी थी। कुछ मौकों पर अल्पसंख्यक सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दिए जाने और ट्रांजिट कैंपों की सुरक्षा बढ़ाने की जानकारी सामने आई थी। मौजूदा घटनाक्रम के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
1990 जैसे माहौल की आशंका से बढ़ी चिंता
कश्मीरी पंडितों को कथित धमकियों के बीच 1990 के दशक की घटनाओं की याद भी चर्चा में है। उस दौर में घाटी में बड़े पैमाने पर भय और असुरक्षा का माहौल बना था, जिसके कारण बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। मौजूदा मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को गंभीरता से ले रही हैं। फिलहाल जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जा रही है। साथ ही कथित सूची की सत्यता, उसके स्रोत और इसके पीछे मौजूद लोगों की भूमिका की जांच अहम मानी जा रही है।