Janaki Jayanti 2026: हिंदू धर्म में जानकी जयंती का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व मां सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना गया है। Janaki Jayanti 2026 इस बार सोमवार के शुभ दिन पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन व्रत, पूजा और व्रत कथा का पाठ करने से मां सीता की अपार कृपा प्राप्त होती है।
जानकी जयंती का धार्मिक महत्व
मां सीता को त्याग, धैर्य, करुणा और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को राजा जनक के यहां माता सीता का प्राकट्य हुआ था। जानकी जयंती पर मां सीता और भगवान श्रीराम की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में प्रेम का वातावरण रहता है।
सोमवार का विशेष संयोग
जब जानकी जयंती सोमवार को आती है, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है और मां सीता को शिव परिवार की बहू के रूप में भी पूजा जाता है। इस दिन व्रत रखने और श्रद्धा से पूजा करने पर मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होने की मान्यता है। विशेष रूप से विवाहित महिलाएं और विवाह की इच्छा रखने वाली कन्याएं यह व्रत करती हैं।
जानकी जयंती व्रत कथा का महत्व
व्रत के दौरान जानकी जयंती की कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है। कथा में मां सीता के जन्म, उनके आदर्श जीवन और श्रीराम के साथ उनके पावन संबंधों का वर्णन किया जाता है। मान्यता है कि व्रत कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। कथा पाठ से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति मिलती है।
व्रत और पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। घर के पूजा स्थान पर मां सीता और भगवान श्रीराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीपक जलाया जाता है। उन्हें फूल, फल, अक्षत और मिठाई अर्पित की जाती है। महिलाएं सोलह श्रृंगार कर मां सीता से सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। अंत में आरती और व्रत कथा का पाठ किया जाता है।
मां सीता की कृपा से जीवन में सुख-शांति
मान्यता है कि जानकी जयंती का व्रत करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। मां सीता अपने भक्तों को धैर्य, शक्ति और सद्बुद्धि का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि यह पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ पूरे देश में मनाया जाता है।