
जन्माष्टमी 2025: भारत में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव—जन्माष्टमी—हर वर्ष भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में अत्यंत भव्यता और आस्था के साथ मनाया जाता है, जहां श्रीकृष्ण का जन्म और बाल्यकाल बीते थे। वर्ष 2025 में जन्माष्टमी 15 अगस्त (शुक्रवार) की रात से प्रारंभ होकर 16 अगस्त (शनिवार) की मध्यरात्रि को मनाई जाएगी।
जन्मोत्सव का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 8:23 बजे से शुरू होकर 16 अगस्त को शाम 6:50 बजे तक रहेगी। श्रीकृष्ण का जन्म निशीथ काल में हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा का समय भी उसी अनुसार माना जाता है। 2025 में निशीथ पूजा का मुहूर्त 16 अगस्त को रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा। इसी समय श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मनाया जाएगा।मथुरा, जिसे श्रीकृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है, वहां स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में इस दिन का आयोजन बेहद भव्य होता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु वहां एकत्र होते हैं और रात्रि जागरण करते हुए भजन, कीर्तन और अभिषेक में भाग लेते हैं। मंदिर को फूलों, लाइट्स और पारंपरिक झांकियों से सजाया जाता है।
पूरी तरह हो जाता है भक्तिमय
वृंदावन, जहां श्रीकृष्ण ने अपनी बाल लीलाएं कीं, वहां का वातावरण जन्माष्टमी के समय पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। प्रमुख मंदिरों जैसे बांके बिहारी मंदिर, राधा रमण मंदिर, आईएसकेकॉन आदि में रात्रिभर झूला दर्शन, रासलीला, दहीहांडी और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।इस पर्व की विशेषता यह है कि श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं और रात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म के बाद ही उपवास तोड़ते हैं। पूजा में पंचामृत से अभिषेक, नए वस्त्र, मुकुट, मोरपंख, बांसुरी और झूले के साथ श्रीकृष्ण का शृंगार किया जाता है। जन्म के समय शंख, घंटी और जयकारों से मंदिर गूंज उठते हैं।
इस तिथि को देशभर में मनाया जाएगा
संक्षेप में, जन्माष्टमी 2025 का पर्व 15–16 अगस्त की रात को मनाया जाएगा, जिसमें मथुरा और वृंदावन में भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक आयोजन देखने योग्य होंगे। यह दिन न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्व रखता है।