जन्माष्टमी 2025 पर महाकाल की नगरी उज्जैन पूरी तरह भक्तिमय हो गई है। यहां स्थित सांदिपनि आश्रम को विश्व की सबसे प्राचीन शिक्षास्थली माना जाता है। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण अपने भाई बलराम के साथ 11 वर्ष की उम्र में शिक्षा ग्रहण करने उज्जैन आए थे। इस पावन स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण ने चार वेद, छह शास्त्र, अठारह पुराण और चौंसठ कलाओं का अध्ययन किया। यही कारण है कि यह आश्रम आज भी भक्तों और श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
द्वापर युग की शिक्षा स्थली
सांदिपनि आश्रम वह स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदिपनि से शिक्षा प्राप्त की थी। यहां श्रीकृष्ण ने न केवल धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया, बल्कि मित्रता, गुरु-शिष्य संबंध और जीवन की वास्तविकताओं को भी जाना। यही वह स्थान है जहां श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता गहरी हुई।
जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन
उज्जैन के सांदिपनि आश्रम में जन्माष्टमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही यहां भक्तों की भीड़ उमड़ी। भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत अभिषेक किया गया और महाआरती से पूरा वातावरण भक्ति से सराबोर हो उठा। गुरुगोविंद उत्सव भी मनाया गया, जिसमें गुरु-शिष्य परंपरा की झलक देखने को मिली।
प्राचीन गोमती कुंड और मंदिर
आश्रम परिसर में स्थित गोमती कुंड के बारे में मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी तीर्थों का जल यहां एकत्र कर दिया था, ताकि गुरु सांदिपनि को तीर्थयात्रा न करनी पड़े। इसके साथ ही यहां सर्वेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर भी है, जहां श्रीकृष्ण ने भगवान शिव की आराधना की थी।
अक्षर ज्ञान की शिला
सांदिपनि आश्रम में आज भी वह शिला मौजूद है, जिस पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपना अक्षर ज्ञान शुरू किया था। परंपरा है कि आज भी माता-पिता अपने बच्चों को लेकर यहां आते हैं और विद्यारंभ संस्कार कराते हैं। माना जाता है कि इस शिला पर अक्षर लिखवाने से बच्चों की बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है।