Krishna Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का इंतजार आज खत्म हो गया है। 4 सितंबर को देशभर में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आ रही है। घरों में भी लड्डू गोपाल को सजाया गया है और रात में कान्हा के जन्म के समय विशेष पूजा और आरती की तैयारियां हैं। जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में भक्त व्रत रखते हैं और दिनभर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहते हैं। हालांकि इस व्रत में सिर्फ खान-पान के नियमों का पालन करना ही जरूरी नहीं माना जाता, बल्कि मन और व्यवहार को भी संयमित रखने की परंपरा है। अगर आपने भी आज जन्माष्टमी का व्रत रखा है तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें, ताकि पूजा-पाठ में किसी तरह की भूल न हो और व्रत की धार्मिक मान्यताओं का भी पालन किया जा सके।
आधी रात के तुरंत बाद व्रत न खोलें
जन्माष्टमी की रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद कई लोग तुरंत व्रत खोल लेते हैं। हालांकि व्रत खोलने का नियम हर परिवार और परंपरा में एक जैसा नहीं होता। कुछ स्थानों पर निशीथ काल की पूजा पूरी होने के बाद पारण किया जाता है। इसलिए अपने घर की परंपरा या जिस मंदिर की मान्यता का आप पालन करते हैं, उसके अनुसार ही व्रत खोलना उचित माना जाता है।
निशीथ काल की पूजा का समय न छोड़ें
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा में निशीथ काल को खास महत्व दिया जाता है। दिल्ली और नोएडा में इस साल निशीथ पूजा का समय करीब रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक बताया गया है। पूजा के समय किसी तरह की जल्दबाजी न हो, इसके लिए लड्डू गोपाल का श्रृंगार, पूजा सामग्री और भोग पहले से तैयार कर लें।
अपनी क्षमता से अधिक कठिन व्रत न रखें
व्रत का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि संयम और भक्ति के साथ भगवान का स्मरण करना है। इसलिए अपनी शारीरिक स्थिति को नजरअंदाज करके निर्जला उपवास करने से बचें। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों या नियमित दवा लेने वालों को व्रत के तरीके को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जरूरत के अनुसार पानी, दूध, फल या व्रत में मान्य खाद्य पदार्थ लिए जा सकते हैं।
व्रत में सामान्य भोजन से बचें
जन्माष्टमी के उपवास में आमतौर पर अनाज और रोजाना खाए जाने वाले भोजन से परहेज किया जाता है। फल, दूध, मेवे और व्रत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का सेवन किया जाता है। हालांकि अलग-अलग परिवारों में व्रत के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने घर की परंपरा के मुताबिक ही भोजन और भोग तैयार करें।
मन को नकारात्मकता से दूर रखें
व्रत सिर्फ खाने-पीने पर नियंत्रण रखने का नाम नहीं है। इस दौरान अपने व्यवहार पर भी संयम रखना जरूरी माना जाता है। बेवजह गुस्सा करना, किसी की निंदा करना, झगड़ा करना या कटु शब्द बोलने से बचें। जन्माष्टमी के दिन भजन, मंत्र जाप और भगवान के ध्यान में समय बिताना अधिक फलदायी माना जाता है।
लड्डू गोपाल की पूजा जल्दबाजी में न करें
जन्माष्टमी की रात बाल गोपाल का अभिषेक और श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। पूजा को केवल एक रस्म समझकर जल्द खत्म करने के बजाय श्रद्धा के साथ करें। अपनी परंपरा के अनुसार भगवान को स्नान कराएं, वस्त्र पहनाएं, फूल और दीप अर्पित करें, भोग लगाएं और अंत में आरती करें। पूजा के दौरान मन को एकाग्र रखने का प्रयास करें।
भगवान को भोग लगाए बिना प्रसाद ग्रहण न करें
जन्माष्टमी पर घर में तैयार किए गए भोजन या विशेष प्रसाद को पहले भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद ही उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसलिए व्रत के दौरान तैयार किए गए पकवान हों या फल-मेवे, पहले कान्हा को भोग लगाएं और फिर स्वयं ग्रहण करें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।