दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के कई वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने किसी भी तरह की हिंसक कार्रवाई से इनकार किया है। वहीं, 23 दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे छात्र प्रतिनिधियों ने विभिन्न जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की अपील के बाद अपना उपवास समाप्त कर दिया।
लाठीचार्ज के दावों पर पुलिस का पक्ष
संसद मार्च के दौरान सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए, जिनमें सुरक्षा बलों के जवान प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाते दिखाई दे रहे हैं। इन दावों के बीच दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की हिंसा या लोगों को हिरासत में लेने जैसी घटना नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम को पेशेवर और संयमित तरीके से संभाला गया तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
अफवाहों से बचने की अपील
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट जानकारियों पर भरोसा न करें। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर और उसके आसपास शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था लगातार सक्रिय रही और सभी से सहयोग की अपेक्षा की गई है।
23 दिन बाद छात्रों ने खत्म किया अनशन
इसी बीच जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन कार्यकर्ताओं—नेहा, मनीष और आमीन—ने अपना 23 दिनों का उपवास समाप्त कर दिया। विपक्षी सांसदों, नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों से मुलाकात कर आंदोलन को संसदीय और लोकतांत्रिक माध्यमों से आगे बढ़ाने की अपील की।
मांगों को संसद में उठाने का भरोसा
प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को संसद के मौजूदा मानसून सत्र में उठाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही यह भरोसा भी दिलाया गया कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और जनआंदोलन के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावों के बीच पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।