Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाने पर जोर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि कुछ लोग हिंसा या पत्थरबाजी जैसी घटनाओं में शामिल भी हो जाएं, तब भी पूरे समूह को उसी नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में संवाद, काउंसलिंग और समझाइश सबसे प्रभावी तरीका है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और कानून-व्यवस्था व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
युवाओं से संवाद पर दिया जोर
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि युवाओं की बात सुनना और उनकी समस्याओं को समझना राज्य की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि कुछ युवक भटक जाते हैं तो उन्हें केवल सख्ती से नहीं, बल्कि सही सलाह और मार्गदर्शन के जरिए मुख्यधारा में लाने की कोशिश होनी चाहिए। अदालत के अनुसार, किसी भी तनावपूर्ण स्थिति में बातचीत और विश्वास का माहौल बनाना सबसे अहम कदम है।
पुलिस और प्रशासन को संयम बरतने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को भी संयम के साथ काम करने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान यदि कोई अप्रिय घटना हो जाए, तब भी अत्यधिक आक्रामक रवैया हालात को और बिगाड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को धैर्य, संवेदनशीलता और संतुलित तरीके से स्थिति संभालनी चाहिए ताकि सामाजिक तनाव न बढ़े।
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आयोजकों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने प्रदर्शन के कथित आयोजकों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि घटना के कई दिन बाद भी आयोजकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दलील दी कि यदि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में हिंसा होती है तो आयोजकों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ कथित आयोजक घटना के बाद भी टीवी चैनलों पर बयान देकर माहौल को प्रभावित कर रहे हैं।
सामुदायिक सेवा की सजा की मांग
यह याचिका जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले युवाओं के खिलाफ सुधारात्मक कार्रवाई की मांग से जुड़ी है। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि ऐसे युवाओं को सात दिन की सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया जाए, ताकि उन्हें अपनी गलती का एहसास हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विषय से जुड़ी कई याचिकाएं पहले से लंबित हैं। इसलिए मौजूदा याचिका को भी उन्हीं मामलों के साथ जोड़ा जाएगा। अब पूरे मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी, जिसमें प्रदर्शन, आयोजकों की जिम्मेदारी और संबंधित अन्य मुद्दों पर आगे विचार किया जाएगा।