दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में युवा देश के अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पहुंचने लगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लाठीचार्ज और आंसू गैस की घटना ने आंदोलन को कमजोर करने के बजाय और मजबूत कर दिया। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई आवश्यक थी।
पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ी भीड़
20 जुलाई को संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद आंदोलन का स्वरूप बदलता दिखाई दिया। जंतर-मंतर पर पहले सीमित संख्या में मौजूद छात्र अब हजारों की तादाद में पहुंच रहे हैं। कई युवाओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो देखने के बाद उन्होंने दिल्ली आकर आंदोलन का हिस्सा बनने का फैसला किया।
देशभर से पहुंच रहे छात्र
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कई युवाओं ने बताया कि वे पहली बार किसी आंदोलन में शामिल हुए हैं। असम, बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से छात्र दिल्ली पहुंचे हैं। उनका कहना है कि वे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही चाहते हैं और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं। कई प्रदर्शनकारी रातभर रुकने की तैयारी के साथ जंतर-मंतर पहुंचे हैं।
दिल्ली पुलिस ने रखा अपना पक्ष
दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध वीडियो व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आंदोलन की दिशा बदली, बहस हुई व्यापक
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब आंदोलन केवल परीक्षा संबंधी मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और जवाबदेही जैसे विषय भी प्रमुख हो गए हैं। जंतर-मंतर पर लगातार बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत दे रही है कि आंदोलन नए चरण में प्रवेश कर चुका है। फिलहाल पुलिस और प्रदर्शनकारियों के अपने-अपने दावे हैं और पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजर बनी हुई है।