जापान सरकार ने 31 जुलाई को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी की स्थापना की। इसका उद्देश्य खुफिया जानकारी जुटाने और उसके विश्लेषण की क्षमता को मजबूत करना बताया गया है।
पहली राष्ट्रीय खुफिया बैठक का आयोजन
हालांकि, इस कदम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी की स्थापना और पहली राष्ट्रीय खुफिया बैठक का आयोजन केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं है, बल्कि यह जापान के सैन्य विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, यह जापान के पुनः सैन्यीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के इरादे को भी दर्शाता है।
व्यापक बदलाव की शुरुआत
विश्लेषकों का मानना है कि ताकाइची सरकार ने राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी की स्थापना के साथ जापान की खुफिया व्यवस्था में व्यापक बदलाव की शुरुआत कर दी है। उनका कहना है कि आने वाले समय में सरकार आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की खुफिया गतिविधियों और क्षमताओं को और मजबूत करेगी तथा पूरी खुफिया प्रणाली को आधुनिक रूप देगी।
ख़ुफिया गतिविधियों को और प्रभावी बनाया
इसी क्रम में बताया गया है कि जापान सरकार पहली राष्ट्रीय खुफिया रणनीति तैयार करने की योजना बना रही है। साथ ही, वह जासूसी रोकथाम कानून लाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इसके तहत तथाकथित जासूसी विरोधी कानून और नियम तैयार किए जाएंगे तथा अगले वर्ष संसद के नियमित सत्र में संबंधित विधेयक पेश करने की योजना है। इसके अलावा, सरकार मार्च 2028 तक एक बाह्य खुफिया एजेंसी स्थापित करना चाहती है, ताकि विदेशों में ख़ुफिया गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा सके।
जासूसी रोकथाम कानून
विश्लेषकों का कहना है कि जापान अपनी राष्ट्रीय ख़ुफिया व्यवस्था का व्यापक पुनर्गठन कर रहा है। इसके तहत राष्ट्रीय खुफिया बैठक और राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी को केंद्र में रखकर एक केंद्रीकृत ढांचा तैयार किया जा रहा है। साथ ही, जासूसी रोकथाम कानून और बाह्य खुफिया एजेंसी की स्थापना के जरिए आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।