Jay Meena Soft Tennis : मध्य प्रदेश के देवास में पले-बढ़े जय मीणा का सपना क्रिकेटर बनने का था। वह बल्ला थामकर मैदान पर नाम कमाना चाहते थे। लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। स्कूल के दिनों में उनकी नजर सॉफ्ट टेनिस कोर्ट पर पड़ी और यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। जिस खेल के बारे में वह ज्यादा नहीं जानते थे, वही आगे चलकर उनकी पहचान बन गया।
बॉल बॉय से शुरू हुआ सफर
पायनियर पब्लिक स्कूल में जय मीणा शुरुआत में सिर्फ सॉफ्ट टेनिस मुकाबले देखने जाते थे। बाद में उन्हें बॉल बॉय की जिम्मेदारी मिली। खिलाड़ियों को खेलते हुए देखते-देखते उनकी दिलचस्पी बढ़ी और उन्होंने खुद भी रैकेट उठाने का फैसला किया। धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया और जय ने पूरी तरह सॉफ्ट टेनिस को अपना लिया।
एशियन गेम्स में रचा इतिहास
जापान में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में जय मीणा ने भारत को सॉफ्ट टेनिस का पहला पदक दिलाकर इतिहास रच दिया। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने फिलीपींस के नुगिट शेरविन को रोमांचक मुकाबले में हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इसके साथ ही भारत का पदक पक्का हो गया। बाद में सेमीफाइनल में जापान के ताकुया कुरोसाका से हारने के बावजूद जय को कांस्य पदक मिला और उनका नाम इतिहास में दर्ज हो गया।
हार के मुहाने से की शानदार वापसी
क्वार्टर फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। जय एक समय पिछड़ रहे थे और मैच उनके हाथ से निकलता दिख रहा था। लेकिन उन्होंने जबरदस्त वापसी की और मुकाबले को टाई-ब्रेकर तक पहुंचाया। निर्णायक क्षणों में भी उन्होंने दबाव झेलते हुए लगातार अंक जुटाए और जीत हासिल कर ली। यही जीत भारत के लिए ऐतिहासिक पदक लेकर आई।
पहले भी दिखा चुके हैं दम
जय मीणा की सफलता अचानक नहीं आई है। 2022 के एशियन गेम्स में वह क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे। 2022 राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता और 2025 में राष्ट्रीय चैंपियन बने। 2024 विश्व सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में उन्होंने मिश्रित युगल में कांस्य पदक जीतकर भारत को पहली बार विश्व स्तर पर भी पदक दिलाया था।
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अब प्रेरणा बन चुके हैं जय
क्रिकेटर बनने का सपना देखने वाला देवास का एक साधारण लड़का आज भारतीय खेल इतिहास का हिस्सा बन चुका है। बॉल बॉय से एशियन गेम्स पदक विजेता बनने तक का उनका सफर मेहनत, धैर्य और जुनून की मिसाल है। जय मीणा की कहानी यह साबित करती है कि कभी-कभी मंजिल वही नहीं होती जो हम चुनते हैं, बल्कि वही होती है जो हमें चुन लेती है।