केंद्र सरकार ने घरेलू विमान यात्रियों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नई प्राइस स्टेबिलाइजेशन योजना के तहत घरेलू एयरलाइंस को तीन साल तक तय दर पर जेट फ्यूल उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कम करना और हवाई किरायों को अधिक स्थिर बनाए रखना है।
10 प्रतिशत बढ़ीं कीमतें
मंगलवार को एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद जेट फ्यूल की कीमत लगभग 105 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर हो गई। हालांकि जो एयरलाइंस नई योजना में शामिल होंगी, उन्हें यही तय कीमत अगले तीन वर्षों तक मिलती रहेगी।
एयरलाइंस को मिलेगा विकल्प
यह योजना पूरी तरह स्वैच्छिक रखी गई है। एयरलाइंस चाहें तो तय कीमत वाली योजना चुन सकती हैं या फिर बाजार आधारित दरों पर फ्यूल खरीद सकती हैं। बाजार आधारित दरें वर्तमान में लगभग 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी हैं। ऐसे में कई एयरलाइंस स्थिर कीमत वाले विकल्प को प्राथमिकता दे सकती हैं।
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किराए पर पड़ेगा असर
विमान कंपनियों के कुल संचालन खर्च में जेट फ्यूल की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत होती है। कई बार यह 60 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। ऐसे में फ्यूल महंगा होने पर टिकट दरों में भी तेजी से बढ़ोतरी होती है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से किरायों में अचानक उछाल को रोका जा सकेगा।
10 हजार करोड़ की योजना
सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी है। जब वैश्विक कीमतें तय आधार दर से ऊपर जाएंगी, तब सरकार तेल कंपनियों को अंतर की भरपाई करेगी। वहीं कीमतें कम होने पर यह राशि वापस सरकारी खाते में जमा कराई जाएगी।
यात्रियों को सीधा फायदा
नई योजना का सबसे बड़ा लाभ आम यात्रियों को मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय तनाव या कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद घरेलू उड़ानों के किरायों पर दबाव कम रहेगा। इससे यात्रियों को अधिक स्थिर और अनुमानित किराया मिलेगा, जबकि एयरलाइंस को भी अपने खर्च की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।