झारखंड में छात्र संगठनों की विभिन्न मांगों को लेकर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर जारी है। मंत्री चमरा लिंडा के नेतृत्व में सरकारी प्रतिनिधियों ने आदिवासी छात्र संघ, आदिवासी हॉस्टल और अन्य छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं और मांगें सुनीं। बैठक में सरकारी नियुक्तियों में बैकलॉग, स्थानीय और जनजातीय भाषाओं के संरक्षण, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरियों में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को क्वालिफाइंग पेपर के रूप में शामिल करने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
दो महत्वपूर्ण मामले पर सरकार के सामने रखे
बैठक के बाद मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि यह संभवतः छात्र संगठनों के साथ बातचीत का अंतिम चरण था। आदिवासी छात्र संघ और आदिवासी हॉस्टल से जुड़े प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं और मांगों को सरकार के सामने रखा। बैठक में कई ऐसी त्रुटियों और समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया गया, जिन्हें लगभग सभी छात्र संगठनों ने उठाया है। आदिवासी छात्र संघ और आदिवासी संगठनों ने मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण मुद्दे सरकार के सामने रखे। पहला मुद्दा सरकारी नौकरियों में बैकलॉग पदों पर नियुक्ति का है। छात्र संगठनों का कहना है कि कई विभागों और सरकारी नौकरियों में आदिवासी एवं अन्य आरक्षित वर्गों के पद खाली रह जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं हो पाती। संविधान और कानून में प्रावधान होने के बावजूद बैकलॉग पदों पर समय पर नियुक्ति नहीं होना गंभीर विषय है। छात्र संगठनों ने इन रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग सरकार के सामने रखी है।
जनजातीय भाषाओं को संरक्षित और सुरक्षित किया
उन्होंने बताया कि बैठक में दूसरा प्रमुख मुद्दा झारखंड की जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और उनके इस्तेमाल को बढ़ावा देने का रहा। आदिवासी संगठनों ने मांग की कि राज्य की जनजातीय भाषाओं को संरक्षित और सुरक्षित किया जाए तथा शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उन्हें उचित स्थान दिया जाए। छात्र संगठनों का कहना है कि बच्चों को स्कूल से लेकर कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर तक अपनी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के अध्ययन का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही, सरकारी नियुक्तियों और परीक्षाओं में भी इन भाषाओं की भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए। छात्र संगठनों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को सरकार ने गंभीरता से सुना और उनका आकलन किया है। अब इन मांगों और सुझावों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।